कौसल, साकेत, अयुद्धा… अयाेध्या के कितने नाम, क्या है इनका मतलब? जहां धर्म ध्वजारोहण करेंगे PM मोदी

कौसल, साकेत, अयुद्धा… अयाेध्या के कितने नाम, क्या है इनका मतलब? जहां धर्म ध्वजारोहण करेंगे PM मोदी

श्रीराम की जन्मभूमि पर अयोध्या में बने मंदिर के शिखर पर आज (मंगलवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्म ध्वजारोहण करेंगे. इसके साथ ही अयोध्या में राममंदिर के पूर्ण होने का संदेश पूरी दुनिया को दिया जाएगा.कौसल की राजधानी रही अयोध्या का प्राचीन नाम साकेत है, जिसे कई परंपराएं नगर के रूप में पहचानती हैं. यानी, कोसल के भीतर स्थित अयोध्या को अनेक साहित्यिक-धार्मिक परंपराएं साकेत कहकर भी पुकारती रही हैं.आइए जान लेते हैं कि अयोध्या के कितने नाम हैं और क्या है इनके मिलने की कहानी?

वैदिक-उत्तरवैदिक काल में कोसल जनपद की अपनी खास प्रतिष्ठा थी. रामायण युग में कोसल एक आदर्श राज्य था, जिसकी राजधानी अयोध्या थी. बुद्ध और महावीर के समय में इसी अयोध्या को साकेत नगर के नाम से पुकारा गया. गुप्त, कुषाण आदि राजवंशों के दौर में इस क्षेत्र को पुनर्परिभाषित किया गया.

मध्ययुग में यही अयोध्या, फैजाबाद क्षेत्र की प्रशासनिक पहचान बनी. इस तरह से इन सबने मिलकर एक ही भूभाग के लिए अलग-अलग स्तरों पर नामों की परतें चढ़ा दीं. कहीं राज्य का नाम प्रमुख हुआ, कहीं नगर का, कहीं धार्मिक-काव्यात्मक उपनाम सबसे ऊपर रहा.

साकेत नाम का मतलब

अयोध्या केवल भूगोल नहीं, आस्था का भी प्रमुख केंद्र है. राम जन्मभूमि, सरयू तट, अयोध्या धाम, रामराज्य की कल्पना सबने अयोध्या शब्द में एक अदृश्य पवित्रता जोड़ दी. अयोध्या को अजित, अजेय, धर्मराज्य का प्रतीक माना गया. वहीं, साकेत वास्तव में मोक्ष, वैकुंठ, परमधाम का सांकेतिक नाम है. इसी तरह से कोसल दरअसल, राम के राज्य का व्यापक भू-राजनीतिक दायरा है. इस तरह एक ही धरती को अलग-अलग कोण से देखने पर नामों का अंतर स्पष्ट होता है, पर अंततः सब एक ही धारा में मिल जाते हैं.

Ayodhya Ram Temple Ceremony (1)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज धर्म ध्वजारोहण करेंगे.

धर्मध्वजा लोकार्पण से नामों की नई चर्चा

हाल के समय में धर्मध्वजा लोकार्पण, राममंदिर निर्माण, श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही और मीडिया कवरेज ने अयोध्या को पूरे विश्व का केंद्र बना दिया है. जैसे-जैसे यह नगर वैश्विक पटल पर पहचान बना रहा है, इसकी ऐतिहासिक जड़ों, प्राचीन नामों और सांस्कृतिक विरासत को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ी है.लोग पूछ रहे हैं कि क्या साकेत और अयोध्या अलग-अलग शहर हैं या एक ही? कोसल तो राज्य था, आज उसकी सीमा कौन-सी मानी जाए? अयुद्धा या अयोध्या कौन-सा रूप ठीक है? इन सभी प्रश्नों की धुरी पर एक ही बात बार-बार उभरती है, जिस शहर को आज हम अयोध्या कहते हैं, वही सदियों से अलग-अलग नामों, अलग-अलग उच्चारणों और अलग-अलग सांस्कृतिक संदर्भों में हमारे साहित्य, पुराण, धर्मग्रंथों और लोककथाओं में ज़िंदा है.

ayodhya Ram Temple Ceremony

धर्म ध्वजारोहण के लिए श्रीराम नगरी अयोध्या जगमगा उठी है.

नाम अनेक, मूल वही अयोध्या

संक्षेप में कहा जाए तो कोसल वह व्यापक जनपद/राज्य था, जिसकी राजधानी अयोध्या रही. अयोध्या राम की जन्मभूमि, कोसल की राजधानी, धर्म, मर्यादा और आदर्श राज्य की प्रतीक नगरी है. वहीं, साकेत, अयोध्या का ही एक सांस्कृतिक-धार्मिक नाम है, जो बौद्ध-जैन परंपरा और हिंदी-संस्कृत काव्य में विशेष रूप से दिखाई देता है. अयुद्धा / अयोध्या / अयोद्धा जैसे नाम लोकभाषा और उच्चारण के विविध रूप हैं, जो मानक अयोध्या से ही निकले हैं.

धर्मध्वजा लोकार्पण जैसे प्रसंगों ने इन नामों को फिर से चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा किया है. इससे एक सकारात्मक बात यह हुई है कि लोग महज पौराणिक भावनाओं तक सीमित न रहकर, इतिहास, भाषा और संस्कृति तीनों की दृष्टि से अयोध्या की परतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं. अंततः, चाहे आप इसे कोसल की राजधानी कहें, साकेत कहें, अयोध्या कहें या लोकभाषा यानी अवधी में अयुद्धासार एक ही है. यह वह धरती है, जहां भारतीय मन ने आदर्श राज्य, मर्यादा पुरुषोत्तम और धर्मराज्य का स्वप्न बुना है. नाम बदल सकते हैं, पर उस स्वप्न की ज्योति आज भी अयोध्या की पहचान को उजाला देती रहती है.

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