
वॉशिंगटन: भारत की जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), ने हाल ही में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे अवैध कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़ किया है जो भारत का नाम खराब करने की कोशिश कर रहे थे. इन कॉल सेंटर्स के जरिए अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था. इस मिशन के लिए सीबीआई ने अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया और धड़ाधड़ गिरफ्तारियां कीं. मिशन पूरा होने के बाद अमेरिका ने भारतीय जांच एजेंसी के लिए तारीफों के पुल बांध दिए हैं. आगे जानें क्या था ये मिशन और कैसे भारत का नाम खराब कर रहे थे अपराधी?
क्या कर रहे थे ये फ्रॉड?
इस अवैध कॉल सेंटर से जुड़े गिरोह पर आरोप है कि उन्होंने साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों से पैसे लूटने का काम किया. अलग-अलग एजेंसियों द्वारा जुटाए गए खुफिया इनपुट के आधार पर सीबीआई ने यह ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के तहत, एक अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क के एक प्रमुख संचालक और मास्टर माइंड विकास कुमार निमर गिरफ्तार कर लिया गया है.
CBI ने कैसे धर दबोचा गिरोह?
विकास पिछले कई सालों से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था, जिसमें कुछ लोगों को लैपटॉप देकर फ्रॉड करने की ट्रेनिंग दी जाती थी. ये लोग डेटा चुराकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे और उनसे पैसे ठगते थे. गिरफ्तारी के बाद CBI ने विकास के घर पर भी छापेमारी की थी और कई अहम सबूत बरामद किए थे. सितंबर 2024 में दर्ज किए गए एक केस की जांच के दौरान पुणे, हैदराबाद और विशाखापट्टनम में छापेमारी कर 4 अवैध कॉल सेंटर पकड़े गए.
इस मिशन की सफलता के बाद अमेरिकी एजेंसी की तरफ से एक पोस्ट शेयर किया गया है, जिसमें CBI की तारीफों के पुल बांधे गए हैं और इसके साथ ही शुक्रिया अदा भी किया गया है. इस पोस्ट में लिखा- ‘भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक अवैध कॉल सेंटर को खत्म कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क में एक प्रमुख संचालक को गिरफ्तार किया है. समन्वित खुफिया जानकारी और निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से, हमारी एजेंसियां भविष्य के घोटालों को रोकने और अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को खत्म करने हेतु मिलकर काम कर रही हैं. आपके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद’.
यह मिशन भारत और अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतरीन सहयोग और समन्वय का उदाहरण है. इस संयुक्त कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है और घोटालों पर नकेल कसने के साथ-साथ दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
