नींद में बच्चे क्यों मुस्कुराते हैं, क्या बच्चे सपने देखते हैं, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कारण

बच्चे नींद में क्यों मुस्कुराते हैं
Image Source : FREEPIK

छोटे बच्चे कई बार सोते-सोते हंसने लगते हैं। महीनेभर का बच्चा नींद में जब मुस्कुराता है तो माता पिता के लिए ये पल रोमांचित कर देने वाला होता है। लोग कहते हैं कि भय माता जो बच्चे का भाग्य लिखती हैं वो बच्चे को हंसाती हैं। कुछ लोग इसे बच्चे के सपने से जोड़कर देखते हैं तो कुछ इसे खेल समझते हैं। लेकिन डॉक्टर इसे बच्चे के विकास का एक अहम पड़ाव मानते हैं। नवजात बच्चे सोते समय हल्की-सी मुस्कान देते तो हुए ये एक जरूरी न्यूरोलॉजिकल और भावनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

डॉक्टर विवेक जैन (वरिष्ठ निदेशक एवं यूनिट प्रमुख, बाल रोग, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग) बताते हैं कि यह मुस्कुराहट बच्चों के विकास, उनके दिमाग की परिपक्वता और भावनात्मक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ी होती है। नवजातों की मुस्कान को ‘रिफ्लेक्स स्माइल’ कहा जाता है। जीवन के शुरुआती हफ्तों में जो मुस्कान दिखाई देती है, वह रिफ्लेक्स होती है। यह बिना किसी बाहरी प्रतिक्रिया के सिर्फ दिमाग की स्वाभाविक क्रिया है। यह स्माइल REM स्लीप (Rapid Eye Movement) के दौरान आती है। इस समय बच्चे के दिमाग का तेजी से विकसित हो रहा होता है और न्यूरल कनेक्शन्स बन रहे होते हैं। यह संकेत है कि बच्चे का नर्वस सिस्टम सही गति से काम कर रहा है।

नींद में मुस्कान दिमाग के विकास का संकेत

जब बच्चा गहरी नींद में हल्की मुस्कुराहट देता है तो इससे पता चलता है कि उसका ब्रेन नई जानकारियां ग्रहण कर रहा है। याददाश्त, सीखने की क्षमता और भावनाओं का विकास इसी समय होता है। यह मुस्कान ब्रेन की गतिविधियों का एक सकारात्मक संकेत है कि वह बाहरी दुनिया को समझने के लिए तैयार हो रहा है।

क्या बच्चे सपने देखते हैं?

माता-पिता अक्सर यह मान लेते हैं कि बच्चा सपनों में मुस्कुरा रहा है। डॉक्टर जैन की मानें तो नवजात बच्चों में सपनों की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि उनका ब्रेन अभी जटिल विजुअल मेमोरी विकसित नहीं करता। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है यानि 3 से 6 महीने के बाद कुछ हद तक सपनों जैसा अनुभव हो सकता है, लेकिन शुरुआती मुस्कुराहट इसका हिस्सा नहीं होती।

मुस्कुराहट का संबंध बच्चे की भावनात्मक सुरक्षा से?

धीरे-धीरे जब बच्चा 2-3 महीने का हो जाता है, तब उसकी “सोशल स्माइल” विकसित होती है। नींद में मुस्कान यह भी दिखाती है कि बच्चा अपने वातावरण में सुरक्षित महसूस कर रहा है। उसे माता-पिता के स्पर्श, आवाज और प्यार की स्मृति बनने लगी है। उसका भावनात्मक विकास सही दिशा में है।

बच्चा नींद में क्यों हंसता है?

  • ब्रेन हेल्थ का संकेत: न्यूरल नेटवर्क के विकसित होने का अच्छा संकेत।

  • भावनात्मक विकास का सहायक: बच्चे को अपने आस-पास के माहौल से जोड़ता है।

  • अच्छी नींद का संकेत: स्वस्थ नींद का मतलब बेहतर इम्युनिटी और विकास।

  • भविष्य की सोशल स्किल्स की नींव: छोटी-छोटी मुस्कुराहटें भावनाओं को समझने और व्यक्त करने की क्षमता बढ़ाती हैं।

डॉक्टर विवेक जैन ने बताया कि अगर बच्चा सामान्य रूप से खा रहा है, बढ़ रहा है और एक्टिव है तो नींद में मुस्कुराना किसी भी चिंता का विषय नहीं है। बल्कि यह माता-पिता के लिए खुशी का कारण होना चाहिए।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

हालांकि मुस्कुराना सामान्य है, लेकिन यदि इसके साथ बच्चे का बार-बार झटके लेना, आंखें उलटना, सांस में रुकावट, शरीर का अकड़ जाना जैसे लक्षण दिखें तो यह सीज़र्स या किसी न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *