भारत-UAE संबंध होंगे और मजबूत, गोल्ड TRQ से लेकर फूड सेफ्टी तक कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

भारत-UAE संबंध होंगे और मजबूत, गोल्ड TRQ से लेकर फूड सेफ्टी तक कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए बातचीत का दौर तेज हो गया है. दोनों देशों ने बाजार तक पहुंच, डेटा शेयरिंग और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जैसी सुविधाएं बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की है. गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि ये वार्ताएं इंडिया-UAE कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) की संयुक्त समिति की बैठक में हुईं. CEPA को एक तरह से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के समान माना जाता है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान और तेज बनाने में अहम भूमिका निभाता है.

डेटा एक्सचेंज और गोल्ड TRQ पर हुई चर्चा

बैठक में CEPA लागू होने के बाद अब तक की प्रगति का पूर्ण आकलन किया गया. दोनों पक्षों ने बाजार में पहुंच, डेटा एक्सचेंज, गोल्ड TRQ (टैरिफ रेट कोटा) आवंटन, एंटी-डंपिंग मामलों, सेवाओं, रूल्स ऑफ ओरिजिन और BIS लाइसेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. भारत की ओर से UAE को बताया गया कि अब गोल्ड TRQ का आवंटन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिससे व्यापार और अधिक खुला और स्पष्ट होगा.

फार्मा सेक्टर पर खास ध्यान

इस बैठक में फार्मा सेक्टर पर भी खास ध्यान दिया गया. दोनों देशों ने दवाओं और मेडिकल उत्पादों से जुड़े रेगुलेटरी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई. इसके अलावा, सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत की APEDA तथा UAE के क्लाइमेट चेंज और एनवायरनमेंट मंत्रालय के बीच फूड सेफ्टी व तकनीकी मानकों पर एक नए समझौते को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा हुई.

भारत और UAE के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है. 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19.6% अधिक है. खास बात यह है कि दोनों देशों ने 2030 तक गैर-तेल और गैर-कीमती धातु वाले व्यापार को अकेले 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों के बीच बढ़ती सहयोग की ये बैठकें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. कुल मिलाकर, भारत-UAE के बीच हो रही तेज और सकारात्मक बातचीत से संकेत मिलते हैं कि आने वाले वर्षों में दोनों देश व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के मामले में और अधिक करीब आएंगे.

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