भारत को मिली 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी, कितना आएगा खर्च, किन सेक्टर्स को होगा फायदा

भारत को मिली 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी, कितना आएगा खर्च, किन सेक्टर्स को होगा फायदा

साल 2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स ऐतिहासिक होने जा रहा है. यह सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि ये खेल अपने 100 साल पूरे करने जा रहा है, बल्कि इसलिए भी है कि क्योंकि भारत को दूसरी बार इन खेलों की मेजबानी करने का मौका मिलने जा रहा है. दिल्ली में 2010 के आयोजन के दो दशक बाद जब अहमदाबाद 2030 का संस्करण आयोजित करेगा, तब यह शहर केवल खेलों का केंद्र ही नहीं, बल्कि आर्थिक, शहरी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का बड़ा मॉडल बनकर उभरेगा. भारत के लिए यह आयोजन भविष्य के ओलंपिक 2036 की दावेदारी को मजबूत करने का मंच भी माना जा रहा है.

हाल के वर्षों में अहमदाबाद ने अपने स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को जिस तरह बदला है, उसने इसे एक स्वाभाविक दावेदार बना दिया है. राष्ट्रमंडल खेल महासंघ की मूल्यांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शहर को मेजबानी की सिफारिश मिली और यह घोषणा न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का आधार बन गई.

साल 2010 में 70 हजार करोड़ का आया था खर्च

भारत ने जब 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स कराए थे, तब आयोजन पर भारी खर्च आया था. शुरुआती अनुमान 16 हजार करोड़ रुपए का लगाया गया था, हालांकि खेल खत्म होने तक 70,000 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका था. 72 देशों की भागीदारी वाले ये गेम्स भले ही महंगे होते हैं, लेकिन उनके साथ आने वाला शहरी विकास कई गुना बड़ा प्रभाव डालता है. यही कारण है कि भारत 2030 की मेजबानी को केवल खेल आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय निवेश के रूप में देख रहा है.

दिल्ली के आयोजन के बाद खेल गांव, स्टेडियम, एयरपोर्ट, मेट्रो, सड़कें और कई अन्य संरचनाएं दिल्ली की पहचान बन गईं. अहमदाबाद भी इस आयोजन से ऐसी ही स्थायी विरासत की उम्मीद कर रहा है, जो शहर के भविष्य को नई दिशा दे सके. इस बार भारत और नाइजीरिया दोनों ने मेजबानी की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत के प्रस्ताव में वह विस्तार, योजना और संसाधन स्पष्ट दिखे, जिन्हें गेम्स फेडरेशन ने प्राथमिकता दी.

Commonwealth Games 1

ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के बजट में भारी कटौती

ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के बजट में भारी कटौती कर दी गई है. यह शहर पूरे आयोजन को आठ मील (लगभग 12 किमी) के दायरे में आयोजित करना चाहता है. उसने इन खेलों का बजट 114 मिलियन पाउंड (लगभग 1300 करोड़ रुपये) रखा है. यही नहीं ग्लास्गो गेम्स से कई महत्वपूर्ण खेलों, कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन और हॉकी को बाहर कर दिया गया. भारत ने इसका काफी विरोध किया क्योंकि इन प्रतियोगिताओं में भारत परंपरागत रूप से मजबूत रहा है. भारतीय ओलंपिक संघ ने साफ कर दिया था कि 2030 के संस्करण में इन सभी खेलों को शामिल किया जाएगा. इस फैसले ने खिलाड़ियों, कोचों और खेल संघों में उत्साह बढ़ाया है और यह संदेश दिया है कि भारत भविष्य में खेलों की वैश्विक व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है.

अहमदाबाद से गांधीनगर तक खुलेंगे विकास के द्वार

2030 के आयोजन की आधिकारिक घोषणा ने अहमदाबाद और गांधीनगर के विकास पर एक नई रोशनी डाल दी है. शहर पहले से ही मेट्रो, नए एक्सप्रेस-वे, रिवरफ्रंट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और विश्व-स्तरीय स्टेडियम जैसे प्रोजेक्ट्स की वजह से बदल रहा था. अब आने वाले वर्षों में इसकी गति कई गुना तेज होने की संभावना है. स्पोर्ट्स सिटी, खेल गांव, एथलीट सुविधा केंद्र, फूड और ट्रांसपोर्ट हब, प्रेस और मीडिया सेंटर, स्पॉन्सर विलेज जैसे ढांचागत प्रोजेक्ट्स शहर के नक्शे को नया रूप देंगे. यह विकास केवल आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेल पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आयोजन क्षमता को स्थायी लाभ पहुंचाएगा.

रियल एस्टेट सेक्टर की नई उड़ान

ऐसे किसी भी बड़े आयोजन से सबसे तेज उछाल रियल एस्टेट सेक्टर में देखने को मिलता है. अहमदाबाद की उत्तर, दक्षिण और गांधीनगर की ओर तेजी से बढ़ती बॉउंड्रीज गेम्स की वजह से और फैलेंगी. खेल गांव, स्टेडियम, नई सड़कें, होटल, व्यापारिक कॉम्प्लेक्स और पर्यटन स्थलों के आसपास जमीनों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसका सीधा लाभ उन डेवलपर्स को मिलेगा जिनके पास पहले से बड़े भू-खंड उपलब्ध हैं. अरविंद स्मार्टस्पेसेज, गोदरेज प्रॉपर्टीज और अदाणी रियल्टी जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में पहले से सक्रिय हैं और गेम्स इनकी परियोजनाओं को और आगे बढ़ा सकते हैं. आने वाले वर्षों में मध्यम और उच्च-स्तरीय आवासीय प्रोजेक्ट्स, सर्विस्ड अपार्टमेंट्स, शॉपिंग हब और ऑफिस स्पेस की मांग में जबरदस्त वृद्धि संभावित है.

एयरपोर्ट और ट्रैवल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहले ही तेजी से अपग्रेड हो रहा है. कॉमनवेल्थ गेम्स के कारण अंतरराष्ट्रीय यातायात, चार्टर फ्लाइट्स, टीम मूवमेंट और बिजनेस डेलीगेशन काफी बढ़ेंगे. इससे एयरपोर्ट के टर्मिनल विस्तार, नई रनवे योजना और एयर कार्गो सिस्टम में सुधार की संभावना है. एयरपोर्ट के आसपास होटल, बिजनेस पार्क और रिटेल हब तेजी से विकसित होंगे, जिससे पूरा क्षेत्र आधुनिक ट्रैवल कॉरिडोर में बदल सकता है.

निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों की मांग में बढ़ोतरी

किसी भी बड़े खेल आयोजन में निर्माण कार्य सबसे बड़ा हिस्सा होता है. अहमदाबाद में स्टेडियम, मल्टी-स्पोर्ट एरेना, नई सड़कें, मेट्रो विस्तार, पुल, हवाई अड्डा अपग्रेडेशन और होटल निर्माण पर भारी निवेश होगा. ऐसे माहौल में L&T, HCC, GMR, टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी कंपनियां प्रमुख ठेकेदार बन सकती हैं. दिल्ली 2010 और एशियाई खेलों जैसे आयोजनों में जिन कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया था, उनकी अनुभव क्षमता अहमदाबाद प्रोजेक्ट्स में भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है.

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नया बूम

लाखों पर्यटक, खिलाड़ी, प्रशिक्षक और अधिकारी जब किसी शहर में आते हैं, तो होटल उद्योग में स्वाभाविक उछाल आता है. 2030 में यह संख्या कई गुना अधिक होने की उम्मीद है क्योंकि भारत में खेल पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. ताज (IHCL), ITC, लेमन ट्री, शैले होटल्स जैसे ब्रांड न सिर्फ गेम्स के दौरान बल्कि उसके बाद भी बने पर्यटन और कारोबारी माहौल का लाभ उठा सकते हैं. गेम्स के पहले और बाद में कई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, ट्रेड इवेंट और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी अहमदाबाद को नए स्तर पर स्थापित करेंगे.

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