
Last Rites Rules: हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है अंतिम संस्कार, यह संस्कार जीवन के सबसे बड़े सत्य मृत्यु के बारे में बताता है. अंतिम संस्कार में मृतक व्यक्ति का पार्थिव शरीर को यानी शव को आग्नि में विलीन किया जाता है. हालांकि अंतिम संस्कार में कई विधि विधान और नियमों का पालन करना चाहिए नहीं तो इसके बुरे प्रभाव जीवन पर पड़ सकते हैं. आइए इस कड़ी में जानें कि श्मशान घाट जाने और वहां किसी का अंतिम संस्कार होते देखना यानी शवदाह देखना किन 4 लोगों को वर्जित है या मना है.
मरणाशौच वाला व्यक्ति
हाल ही जिस व्यक्ति के घर में किसी की मृत्यु हुई हो तो उस समय को मरणाशौच का समय कहते हैं. इस समयावधि में उसे किसी और के घर के सदस्य के अंतिम संस्कार में नहीं जाना चाहिए. क्योंकि इसे लेकर मान्यता है कि इससे दोनों मृतक के आत्मा शांत नहीं हो पाती है. मरणाशौच की स्थिति में व्यक्ति किसी धार्मिक अनुष्ठान में भी नहीं जा सकता है.
बीमार या कमजोर व्यक्ति
बीमार और कमजोर व्यक्ति को कभी भी किसी के अंतिम संस्कार में नहीं शामिल होना चाहिए इससे उसके मन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.
छोटे बच्चे
छोटे बच्चों को श्माशान घाट पर लेकर नहीं जाना चाहिए और न तो किसी का अंतिम संस्कार होते दिखाना चाहिए. श्मशान भूमि पर और भी चीताएं जलती है और ऐसी स्थिति में अगर बच्चे को श्मशान घाट लेकर जाएंगे तो उसके मन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. उनके मन में किसी की मृत्यु का डर डीवन भर बना रह सकता है.
गर्भवती महिला
किसी भी गर्भवती महिला को श्मसान घाट पर जाने से मना किया जाता है. न तो गर्भवती महिला को अंतिम संस्कार देखना चाहिए. ऐसा करने से महिला के बच्चे पर नकारात्मक उर्जा का प्रभाव पड़ सकता है
