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जो महिलाएं अभी मां बनने वाली हैं उनके मन में अक्सर कई सवाल आते हैं। खासतौर से उन महिलाओं के लिए यह बड़ा सवाल है जो ऑफिस गोइंग हैं या घर पर ज्यादा देर नहीं रह पाती हैं। ऐसे में बच्चे को दूध कैसे पिलाएं। क्या ब्रेस्ट पंप मशीन का इस्तेमाल सुरक्षित है, इससे दूध बनना कम तो नहीं होगा और 6 महीने तक बच्चे को किस पैटर्न में दूध देना चाहिए। ऐसे न जाने कितने सवाल नई मां के जहन में आते हैं। इन्हीं सवालों का जवाब जानते हैं आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंचल शर्मा से।
क्या ब्रेस्ट पंप मशीन से दूध निकालकर बच्चे को पिलाना सही है?
आजकल लगभग सभी महिलाएं घर के साथ साथ बाहर का काम भी करती हैं इसलिए जरुरी नहीं है कि वह हमेशा बच्चे के साथ ही रहें और उन्हें फीडिंग करा पाएं। इसलिए ब्रेस्ट पंप से दूध निकालकर बच्चे के लिए रख देती हैं जिससे जब भी जरुरत हो बच्चे को दूध पिलाया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को ब्रेस्ट पंप से दूध निकालकर पिलाना बिल्कुल सुरक्षित है।
ब्रेस्ट पंप के फायदे
- जिन महिलाओं को निप्पल में दर्द की समस्या होती है उनके लिए फायदेमंद तरीका है।
- कामकाजी महिलाओं के लिए यह तरीका बहुत फायदेमंद है।
- इससे दूध का सप्लाई भी सही रहती है।
क्या ब्रेस्ट पंप से दूध बनना कम हो जाता है?
नहीं, यह एक मिथक मात्र है कि ब्रेस्ट पंप से दूध बनना कम हो जाता है। जबकि सच बात तो यह है कि आपको इसका सही तरीका मालूम होना चाहिए। आप एक निश्चित अंतराल पर पंप का प्रयोग करें तो इससे दूध बनना कम नहीं होगा। बल्कि इससे दूध उत्पादन बढ़ने की संभावना बनी रहती है।
किन मामलों मे दूध कम हो सकता है?
- अगर आप पंप का इस्तेमाल कम बार करते हैं।
- दूध निकालने वाले पंप के suction की सेटिंग ठीक नहीं है।
- लंबे अंतराल पर फीडिंग कराती हैं।
6 महीने के बच्चे को मां का दूध पिलाना कितना जरूरी है?
डॉ चंचल शर्मा बताती हैं कि पहले 6 महीने तक बच्चे को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। इस विषय में WHO और UNICEF का भी मानना है कि इससे बच्चे का सही विकास होता है और वह कई रोगों से सुरक्षित रहता है।
मां का दूध पिलाने से क्या फायदे होते हैं?
- मां के दूध का सेवन करने से बच्चे की immunity मजबूत होती है।
- बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और वह एलर्जी, संक्रमण या डायरिया (Diarrhea) जैसे रोगों से सुरक्षित रहता है।
- बच्चे के शरीर और मस्तिष्क का सही तरीके से विकास होता है।
- बच्चे की पाचन शक्ति मजबूत होती है।
- बच्चे का अपनी मां के साथ अच्छा बॉन्ड बन पाता है।
6 महीने तक बच्चे को कितने-कितने घंटे में दूध पिलाना चाहिए?
शुरूआती 6 महीने तक मां भी बच्चे की जरुरत को समझने की कोशिश करती है इसलिए इस दौरान फीडिंग आवश्यकता अनुसार होनी चाहिए। यानी जब जब आपको लगे कि बच्चे को भूख लगी है आप उसे फीडिंग करा सकती है। सामान्यतः प्रत्येक 2-3 घंटे में बच्चे को फीडिंग करानी चाहिए। इस अनुसार आप दिन भर में करीब 8-10 बार फीड करा सकती हैं। आपको यही अंतराल रात के समय भी रखना है।
ध्यान रखने वाली बात है कि जब आपका बच्चा छोटा है तो उसकी भूख का पता लगाना आपकी जिम्मेदारी है इसलिए शुरू में थोड़ी परेशानी हो सकती है लेकिन जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता है उसके फीड कराने का अंतराल आप बढ़ा सकती हैं।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
