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प्रदूषण फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फेफड़ों की समस्याएं सांस लेने में तकलीफ का मुख्य कारण बन सकती हैं। ब्रीदिंग प्रॉब्लम से बचाव के लिए फेफड़ों को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर आप भी अपने लंग्ज को स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं, तो आपको कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बना लेना चाहिए। प्राणायाम को फेफड़ों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
मददगार कपालभाति- पुराने जमाने से कपालभाति को सेहत के लिए वरदान माना जाता रहा है। कपालभाति करने के लिए आपको सबसे पहले गहरी सांस लेनी है और फिर आपको अपने पेट की मांसपेशियों को यूज करते हुए तेजी से सांस छोड़नी है। जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्या रहती है, उन्हें अक्सर कपालभाति करने की सलाह दी जाती है। आप भी प्रदूषण के कहर से बचने के लिए कपालभाति करना शुरू कर सकते हैं।
नाड़ी शोधन प्राणायाम- आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नाड़ी शोधन प्राणायाम को अनुलोम-विलोम के नाम से भी जाना जाता है। अनुलोम-विलोम करना बहुत आसान है। सबसे पहले एक नाक बंद करके दूसरी से सांस लीजिए और फिर सांस छोड़िए। इसके बाद आपको दूसरी नाक बंद करके पहली से सांस लेनी है और फिर सांस छोड़नी है। अनुलोम-विलोम फेफड़ों को साफ करता है और ऑक्सीजन को बढ़ाने का काम करता है।
फायदेमंद भस्त्रिका- भस्त्रिका करने के लिए जोर-जोर से सांस लेनी और छोड़नी होती है। फेफड़ों की सेहत को मजबूत बनाने के लिए भस्त्रिका की मदद ली जा सकती है। अगर आप भस्त्रिका को अपने डेली रूटीन में शामिल करते हैं, तो लंग्ज में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारा जा सकता है। प्रदूषण के कहर से बचने के लिए और फेफड़ों की सेहत को डैमेज होने से बचाने के लिए इस तरह की ब्रीदिंग एक्सरसाइज फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
