नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल पर भी आ सकता है हार्ट अटैक, AIIMS डॉक्टर से जानें पता लगाने के लिए किन टेस्ट को कराना चाहिए?

हार्ट अटैक
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हार्ट अटैक अब सिर्फ़ उम्र दराज लोगों की बीमारी नहीं रहा। आजकल की बदलती जीवनशैली और खान पान की वजह से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। हालाँकि, हार्ट से जुड़ी बीमारियों के पीछे अक्सर शरीर में बढ़ते बैड कोलेस्ट्रॉल को ज़िम्मेदार माना जाता है, लेकिन यह अकेला रिस्क फैक्टर नहीं है। डॉ. प्रियंका सहरावत, जनरल फ़िज़िशियन और न्यूरोलॉजिस्ट, द न्यूरोमेड क्लिनिक, गुरुग्राम, एमडी मेडिसिन, एम्स दिल्ली से डीएम न्यूरोलॉजी, ने 20 दिसंबर की अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में कोलेस्ट्रॉल के अलावा अन्य दो मुख्य संकेत के बारे में बताया है जो हार्ट अटैक की वजह बन सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक के जोखिम को क्यों खत्म नहीं कर सकते?

डॉ. सहरावत कहती हैं, अगर कोलेस्ट्रॉल लेवल सामान्य है, तब भी आपको हार्ट अटैक का खतरा ज़्यादा हो सकता है। जब हम लिपिड प्रोफ़ाइल देखते हैं, तो हम आमतौर पर खराब कोलेस्ट्रॉल, LDL लेवल और ट्राइग्लिसराइड्स पर ध्यान देते हैं और मानते हैं कि सिर्फ़ यही हमारे जोखिम को तय करते हैं। हालाँकि, कुछ और भी चीज़ें हैं जो ज़्यादा सटीक तस्वीर दे सकती हैं।

हार्ट अटैक के जोखिम का पता लगाने के लिए ये दो टेस्ट कराएं: 

डॉ. सहरावत कहती हैं कि हार्ट अटैक के जोखिम का पता लगाने के लिए, कोलेस्ट्रॉल के अलावा, इन दो मार्कर पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

  • एपोलाइपोप्रोटीन B (APOB): एपोलाइपोप्रोटीन B एक ज़रूरी प्रोटीन है जो बैड कोलेस्ट्रॉल में पाया जाता है, और रक्त में फैट को ले जाने का काम करता है। यह सभी तरह के कोलेस्ट्रॉल, LDL, VLDL और अन्य में ये कण होते हैं। जब इनकी संख्या ज़्यादा होती है, तो ये खून की नसों की दीवारों से चिपक जाते हैं, जिससे प्लाक बनता है और खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है। बढ़े हुए एपोलाइपोप्रोटीन B लेवल अक्सर अंदरूनी मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़े होते हैं। ऐसे में एपोलाइपोप्रोटीन B टेस्ट खून में कोलेस्ट्रॉल के कणों की संख्या को मापता है। 

  • लिपोप्रोटीन (ए) ( Lipoprotein(a)): दूसरा मुख्य मार्कर लिपोप्रोटीन (ए) है। लिपोप्रोटीन (ए) एक प्रकार का बैड कोलेस्ट्रॉल है, जो जेनेटिक जोखिम कारक माना जाता है और दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को काफी बढ़ाता है। जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, उन्हें अपने लिपोप्रोटीन (ए) लेवल की जाँच करवानी चाहिए।

डॉ.  सहरावत इस बात पर ज़ोर देती हैं कि सिर्फ़ स्टैंडर्ड कोलेस्ट्रॉल नंबरों पर भरोसा करना गुमराह करने वाला हो सकता है।हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन करने में ApoB और लिपोप्रोटीन (ए) दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट हैं।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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