मूड स्विंग या खतरे की घंटी! बार-बार बदलता मूड हो सकता है इस मानसिक बीमारी का संकेत..

मूड स्विंग या खतरे की घंटी! बार-बार बदलता मूड हो सकता है इस मानसिक बीमारी का संकेत..

Mood Disorder: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मूड का बदलना आम बात मानी जाती है. कभी खुशी तो कभी उदासी, कभी गुस्सा तो कभी चुप्पी को ज्यादातर लोग थकान, तनाव या रोजमर्रा की परेशानी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर मूड बार बार बिना किसी ठोस वजह के बदल रहा है और इसका असर आपकी सोच, रिश्तों और काम पर पड़ रहा है, तो ये सिर्फ आदत नहीं बल्कि मानसिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है.

मूड स्विंग का मतलब सिर्फ अच्छा या बुरा महसूस करना नहीं होता. जब इंसान का मूड अचानक बहुत ज्यादा खुश या बहुत ज्यादा उदास हो जाए और ये स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नॉर्मल नहीं कहा जा सकता है. मूड डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें इंसान की भावनाएं उसके कंट्रोल में नहीं रहतीं हैं. बार बार होने वाला मूड स्विंग कई बार मूड डिसऑर्डर से जुड़ा होता है. ये एक मानसिक समस्या है जिसमें व्यक्ति का इमोशनल बैलेंस बिगड़ जाता है. समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और सही इलाज लेना बेहद जरूरी होता है वरना ये एक संकट का विषय बन सकता है.

मूड डिसऑर्डर
इस बीमारी में व्यक्ति कभी बहुत ज्यादा एनर्जेटिक और आत्मविश्वास से भरा हुआ महसूस करता है, तो कभी अचानक खुद को खाली, थका हुआ और बेकार समझने लगता है. कई बार बिना किसी कारण रोना, छोटी बातों पर गुस्सा आना, लोगों से दूरी बनाना और खुद को अकेला रखना इसके आम लक्षण हो सकते हैं. आजकल की युवा पीढ़ी खास कर के इस बीमारी से काफी ज्यादा जूझ रही है.

डिप्रेशन
मूड डिसऑर्डर के कई प्रकार होते हैं जिसमें डिप्रेशन सबसे आम है. डिप्रेशन में व्यक्ति लंबे समय तक उदासी, निराशा और नकारात्मक सोच से घिरा रहता है. जिस वजह से रोजमर्रा के काम पर भी काफी असर पड़ता है. ऐसी स्थिति में किसी काम में मन नहीं लगता है और नींद पर भी असर पड़ता है.

बाइपोलर डिसऑर्डर
इसके अलावा बाइपोलर डिसऑर्डर भी एक गंभीर मूड डिसऑर्डर है. इसमें व्यक्ति कभी बहुत ज्यादा खुश और एक्टिव रहता है, जिसे मैनिक फेज कहा जाता है. ये बदलाव अचानक और बहुत तेज होता है, जिससे रिश्तों और करियर दोनों पर असर पड़ सकता है

मेंटल हेल्थ
आजकल के बिजी लाइफस्टाइल में सोशल मीडिया, काम का दबाव, नींद की कमी और इमोशनल सपोर्ट का अभाव भी मूड डिसऑर्डर को बढ़ा सकता है. लोग बाहर से मुस्कुराते रहते हैं लेकिन अंदर ही अंदर टूट रहे होते हैं. सबसे बड़ी समस्या ये है कि मेंटल हेल्थ को आज भी लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं. बहुत से लोगों को इसकी खबर भी नहीं होती हैं कि उन्हें मूड डिसऑर्डर की समस्या है.

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