शिमला फर्जी डिग्री घोटाला: फरार मां-बेटे को अदालत ने घोषित किया भगोड़ा..

शिमला फर्जी डिग्री घोटाला: फरार मां-बेटे को अदालत ने घोषित किया भगोड़ा..

शिमला के चर्चित फर्जी डिग्री घोटाले मामले के दो मुख्य आरोपी मनदीप राणा (पुत्र) और उसकी मां अशोनी कंवर को शिमला की पीएमएलए (PMLA) अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender FEO) घोषित कर दिया है. दोनों आरोपी काफी समय से भारत से फरार थे और जांच एजेंसियों से बचते हुए ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं. अदालत ने यह फैसला शनिवार को सुनाया.

अधिकारियों ने बताया कि शिमला स्थित एक निजी विश्वविद्यालय के प्रमोटर मां-बेटे को, हिमाचल प्रदेश में छात्रों को कथित तौर पर फर्जी डिग्रियां बेचने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया गया है. उन्होंने बताया कि मंदीप राणा और उनकी मां अशोनी कंवर के खिलाफ 2018 के भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत घोषणा की गई है.

ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं दोनों आरोपी

मंदीप राणा और अशोनी कंवर ये दोनों सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय के प्रमोटर हैं, जिनमें मुख्य प्रमोटर और कंवर के पति राज कुमार राणा भी शामिल हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, दोनों आरोपी, जिन्हें एफईओ घोषित किया गया है, वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं.

फर्जी डिग्री घोटाले में आरोप

फर्जी डिग्री घोटाले में आरोप है कि आरोपियों ने नकली शैक्षणिक डिग्रियों के जरिए लोगों को ठगा और अवैध रूप से भारी मात्रा में धन अर्जित किया. जांच में सामने आया कि इस रैकेट के जरिए न सिर्फ छात्रों का भविष्य खराब किया गया, बल्कि सरकारी नियमों और कानूनों की भी खुली अवहेलना की गई.

ईडी ने 2020 में दर्ज किया था केस

ईडी ने 2020 में प्रमोटरों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था. ईडी ने 2024 में जारी एक बयान में आरोप लगाया था कि राज कुमार राणा और उनके सहयोगियों ने फर्जी डिग्रियों की बिक्री के माध्यम से 387 करोड़ रुपए की आपराधिक आय प्राप्त की थी.

दोनों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई

दिसंबर 2022 में ईडी ने राज कुमार राणा और 15 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. इसके बाद, शिमला स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने जनवरी 2023 में संज्ञान लेते हुए अशोनी कंवर और मनदीप राणा को समन जारी किया. दोनों ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने नवंबर 2023 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए. एफईओ के बयान के आधार पर अब एजेंसी दोनों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई करेगी.

एफईओए का उद्देश्य

एफईओए का उद्देश्य उन लोगों को न्याय के कटघरे में लाना है जो कम से कम 100 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी के मामलों में कानून की गिरफ्त से बचने के लिए भारत छोड़कर भाग गए हैं. शराब कारोबारी विजय माल्या और ब्रिटेन स्थित हथियार सलाहकार संजय भंडारी को पहले ही एफईओए घोषित किया जा चुका है.

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