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भारत में लोग मीठा खाने के बहुत शौकीन हैं। यहां के खाने में जितनी मिठास होती है उतनी शायद ही कहीं होती होगी। चीनी, गुड़, शहद, शक्कर, खांड और स्टेविया से लेकर तमाम तरह की मीठी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। नेचुरल शुगर के नाम पर भी लोग भर-भरकर मीठा खा रहे हैं। डॉक्टर की मानें तो दिनभर में हम जितनी कैलोरी ले रहे हैं उसमें शुगर 5 प्रतिशत के बराबर होना चाहिए। तो अगर आप एक नॉर्मल हेल्दी युवा हैं तो आपको दिनभर में 4-5 चम्मच से ज्यादा शुगर नहीं लेनी चाहिए। इसमें आपकी चाय, कॉफी, बिस्किट, मीठा और दिनभर में जो भी मीठी चीजें खाते हैं वो सब शामिल होनी चाहिए। कैंसर सर्जन डॉक्टर जयेश शर्मा ने इन मीठी चीजों को रेटिंग दी है। जिसमें सफेद चीनी को परिवार का बिगड़ा बच्चा बताया है जो इस टेस्ट में फेल है।
कौन सी शुगर फायदेमंद है और कौन सी नुकसानदायक
पाउच में मिलने वाली शुगर- सबसे पहले बात करते हैं ऐसी मीठी चीजों को जो मिठास बढ़ाने के लिए बाजार में पाउच में मिलती हैं। जो शुगर फ्री कोलाज में मिलते हैं। सेक्रीन हो या एस्पर्टेम हो ये बहुत ज्यादा टॉक्सिक नहीं होते हैं। इनसे कैंसर नहीं होता है और कैलोरीज कम करने में ये हमारी मदद कर सकते हैं। लेकिन पेट के बैक्टीरिया पर ये असर डाल सकते हैं। कई लोगों को इसके बाद भूख बहुत लगती है। इसलिए ये वजन घटाने में बहुत ज्यादा असरदार नहीं है। इन्हें डॉक्टर ने 55% रेटिंग दी है।
शुगर फ्री- लो कैलोरी शुगर सबस्टीट्यूट होते हैं जो शुगर फ्री कैंडीज में, शुगर फ्री मिठाईयों में होते हैं ये सुक्रालोज, एरिथ्रिटोल जैसे मॉलिक्यूल्स होते हैं। जो शुगर के मॉलिक्यूल्स के समान होते हैं इसलिए ये जीभ को मीठे लगते हैं लेकिन पेट में जाकर ये अब्जॉर्ब नहीं होते हैं या बहुत कम होते हैं। इसलिए कैलोरीज बहुत कम या जीरो रहती हैं और शुगर स्पाइक बिल्कुल नहीं होता है। लेकिन ये भी पेट के बैक्टीरिया पर थोड़ा बुरा असर करते हैं। शुगर से बेहतर हैं 70 प्रतिशत रेटिंग दी जा सकती है।
स्टेविया और मोंक फ्रूट नेचुरल स्वीटनर- इन दिनों स्टेविया और मोंक फ्रूट जैसे नेचुरल स्वीटनर का क्रेज लोगों में काफी बढ़ रहा है। ये प्लांट बेस्ड हैं और खाने के बाद इनका टेस्ट कड़वा भी नहीं लगता है। इसमें कैलोरीज नहीं होती हैं। इससे शुगर स्पाइक नहीं होता है। स्टेविया को तो गरम करने पर भी इसका स्वाद वैसा ही रहता है। इसलिए लोग इसे कुकिंग में इस्तेमाल करने लगे हैं। मोंक फ्रूट का डेटा अभी तक नहीं है लेकिन ये शुगर के अच्छे सब्सीट्यूटहो सकते हैं। इन्हें 80 प्रतिशत रेटिंग मिलती है।
सफेद चीनी- सफेद चीनी के कोई फायदे नहीं है। कोई इसका अलग से फ्लेवर नहीं है और शुगर स्पाइक तेजी से करता है। इंसुलिन रजिस्टेंस करता है। मोटापा बढ़ाता है। सफेद चीनी पूरी स्वीटनर फेमिली का बिगड़ा हुआ बच्चा है, जो सिर्फ 15 प्रतिशत नंबर लाकर फेल हो रहा है।
शहद, गुड़ और खांड नेचुरल शुगर- ये प्रोसेस्ड नहीं होते हैं। इनका फ्लेवर अच्छा होता है। इसमें बहुत कम मात्रा में मिनरल भी होते हैं, लेकिन अगर आप इन्हें नेचुरल मानकर बहुत ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं तो ये रिफाइंड शुगर के बराबर ही नुकसान करते हैं। शुगर स्पाइक भी तेजी से करते हैं। इसलिए फ्लेवर के लिए डाल रहे हैं तो ठीक है, लेकिन ये चीनी की विकल्प नहीं हैं। इन्हें 55 प्रतिशत रेटिंग मिलती है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
