क्या आपकी पत्नी में भी हैं ये खूबियां? गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसी स्त्रियां संवार देती हैं सात पीढ़ियां..

क्या आपकी पत्नी में भी हैं ये खूबियां? गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसी स्त्रियां संवार देती हैं सात पीढ़ियां..

Garuda Purana: सनातन धर्म के 18 महापुराणों में गरुड़ पुराण का अहम स्थान है. आमतौर पर इसे मृत्यु के बाद की स्थितियों से जोड़कर देखा जाता है, परंतु इसके नीतिसार खंड में जीवन को बेहतर बनाने के अद्भुत रहस्यों का भंडार है. भगवान विष्णु और पक्षीराज गरुड़ के संवाद के माध्यम से इस ग्रंथ में पूजा, व्रत और नीति-नियमों के साथ-साथ गृहस्थ जीवन की सफलता के सूत्र भी बताए गए हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, एक सुखी परिवार की धुरी उस घर की स्त्री होती है. भगवान विष्णु ने स्त्री के कुछ ऐसे विशेष गुणों और कर्तव्यों की चर्चा की है, जो न सिर्फ पति का जीवन संवारते हैं, बल्कि सात पीढ़ियों का उद्धार कर सकते हैं. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार एक श्रेष्ठ पत्नी के क्या लक्षण हैं.

मर्यादित और विवेकपूर्ण आचरण

शास्त्रों के अनुसार, वह महिला गुणी कहलाती है जो अपने पति की बातों का सम्मान करती है. यहां आज्ञा पालन का अर्थ अंधानुकरण नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति समर्पण है. एक विवेकशील पत्नी का यह भी कर्तव्य है कि यदि पति मार्ग से भटक रहा हो या गलत निर्णय ले रहा हो, तो वह उसे सही और गलत के बीच का भेद समझाकर सही दिशा दिखाए.

घर के काम में कुशल

शादी के बाद घर की व्यवस्था की मुख्य जिम्मेदारी महिला पर होती है. जो महिला अपने घर की आर्थिक स्थिति, स्वच्छता और दैनिक कार्यों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करती है, उस घर में दरिद्रता कभी वास नहीं करती. गृहस्थी की जिम्मेदारियों को प्रसन्नतापूर्वक निभाना एक सुलक्षणा पत्नी की प्रमुख पहचान है.

मधुर वाणी और पारस्परिक सम्मान

पति-पत्नी का रिश्ता प्रेम और सम्मान की नींव पर टिका होता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, पत्नी को हमेशा संयमित और मधुर भाषा का प्रयोग करना चाहिए. कटु शब्दों के प्रयोग से न सिर्फ रिश्ते में दरार आती है, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचती है. जब पत्नी अपने पति को सम्मान देती है, तो बदले में उसे अपार स्नेह और समाज में गौरव प्राप्त होता है.

निष्ठा और पवित्रता

एक आदर्श पत्नी के लिए पतिव्रता धर्म सर्वोपरि माना गया है. विवाह के बाद मन, वचन और कर्म से अपने जीवनसाथी के प्रति निष्ठावान रहना ही सबसे बड़ी तपस्या है. जो महिला किसी दूसरो पुरुष के चिंतन से दूर रहकर अपने वैवाहिक धर्म का पालन करती है, उसका जीवन सदैव खुशहाली और मानसिक शांति से भरा रहता है.

परिवार का सामंजस्य और बुजुर्गों का आदर

ससुराल में आने के बाद केवल पति ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार के प्रति स्नेह भाव रखना एक श्रेष्ठ पत्नी का गुण है. घर के बुजुर्गों का सम्मान और छोटों के प्रति ममत्व रखने वाली महिला पूरे परिवार को एकता के सूत्र में बांधकर रखती है. ऐसे घरों में कलह की जगह हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

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