
वॉशिंगटन। ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच 26 साल के इरफान सुलतानी को आज फांसी दी जा सकती है। ईरान में हिंसक प्रदर्शन की वजह से भारत सरकार ने बुधवार को नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, व्यापारी हों या पर्यटक, इस समय ईरान में हैं, उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकल जाना चाहिए।
इस एडवाइजरी में कहा गया है कि यह सलाह 5 जनवरी की पिछली एडवाइजरी के आगे की कड़ी है और ईरान की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है। सरकार ने यह भी दोहराया है कि सभी भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहना चाहिए।
ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें ताकि किसी भी नई जानकारी से अवगत रहें। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बुधवार देर शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर ईरान से जुड़े हालातों पर बात।
ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने यह पोस्ट किया है…
दावा- ईरान में 12 हजार लोगों की मौत ईरान में बुधवार शाम 300 शवों को दफनाया जाएगा। अंग्रेजी अखबार द गार्डियन के मुताबिक, शवों में प्रदर्शनकारियों के साथ सुरक्षा बलों के शव भी शामिल होंगे। ये कार्यक्रम कड़ी सुरक्षा के बीच तेहरान यूनिवर्सिटी के कैंपस में हो सकता है।
प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक 2,550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकार से जुड़े लोग शामिल हैं।
हालांकि ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।
26 साल के प्रदर्शनकारी को फांसी दी जाएगी
ईरान में 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को आज फांसी दी जा सकती है। द गार्डियन के मुताबिक उन्हें 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। 11 जनवरी को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
उन पर हिंसा भड़काने और ‘ईश्वर के खिलाफ जंग छेड़ने’ जैसा आरोप लगाया गया। इस मामले में आगे कोई ट्रायल नहीं होगा, परिवार को सिर्फ 10 मिनट के लिए आखिरी मुलाकात का मौका मिलेगा।
ईरान में हिंसक विरोध प्रदर्शन का आज 18वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि अगर ईरान में अधिकारी सरकार के खिलाफ विद्रोह पर कार्रवाई में लोगों को फांसी देना शुरू करते हैं तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा।
इसके बाद ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और इजराइली PM नेतन्याहू को ईरान में लोगों का हत्यारा बताया।
सुल्तानी पर सरकार के खिलाफ जंग भड़काने का आरोप
सुल्तानी पर मोहरेबेह (भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का आरोप लगाया गया है। यह ईरानी कानून में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है, जिसकी सजा मौत (फांसी) होती है।
यह आरोप आमतौर पर उन लोगों पर लगाया जाता है, जो सरकार के खिलाफ विद्रोह या जंग भड़काने के दोषी माने जाते हैं। सुल्तानी को ट्रायल, वकील या अपील का मौका नहीं दिया गया। गिरफ्तारी के बाद परिवार को बताया गया कि उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है और 14 जनवरी को इसे अमल में लाया जाएगा।
मानवाधिकार संगठन और एक्साइल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह फास्ट-ट्रैक एक्जीक्यूशन (रैपिड/शो ट्रायल) का हिस्सा है। सरकार का मकसद डर फैलाकर बाकी हजारों प्रदर्शनकारियों (10,000+ गिरफ्तार) को चुप कराना है। यह विरोध प्रदर्शन के दौरान पहली फांसी होगी।
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे अधिक लोगों को फांसी देने वाला देश है। नॉर्वे स्थित ईरान मानवाधिकार समूह के मुताबिक, पिछले साल ईरान ने कम से कम 1,500 लोगों को फांसी दी।
दावा- अरब देशों की ट्रम्प से ईरान पर हमला न करने की अपील
इजराइल और कुछ अरब देशों के अधिकारियों ने अमेरिका से कहा है कि वह फिलहाल ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला न करे। एनबीसी न्यूज के मुताबिक, इन अधिकारियों का मानना है कि ईरान की सरकार अभी इतनी कमजोर नहीं हुई है कि अमेरिकी हमले से उसका खात्मा हो सके।
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या के मामले में अमेरिका को क्या कदम उठाना चाहिए, इस पर उन्होंने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन के पक्ष में हैं और इस मामले में अमेरिका की कोशिशों का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि सिर्फ विदेशी सैन्य कार्रवाई से यह टारगेट पूरा नहीं होगा। उनका मानना है कि इससे ईरान की सरकार गिरने के बजाय हालात और जटिल हो सकते हैं।
इजराइल ने अमेरिका को सुझाव दिया कि वह सैन्य हमले के बजाय ऐसे कदमों पर ध्यान दे, जिनसे ईरान की सरकार अंदर से कमजोर हो। इसमें ईरान के लोगों को कम्युनिकेशन ब्लैक आउट से निपटने में मदद देना, आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करना, साइबर हमले करना या ईरान के बड़े अधिकारियों पर सीमित हमले करना शामिल है, ताकि सरकार पर दबाव बढ़े।
रिपोर्ट में एक अरब अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस समय अमेरिका के नेतृत्व में ईरान पर हमले को लेकर पड़ोसी देशों में ज्यादा समर्थन नहीं है। एक अन्य अरब अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजराइल ने हमला किया, तो इसका उल्टा असर हो सकता है और ईरान के लोग सरकार के समर्थन में एकजुट हो सकते हैं।
मिडिल ईस्ट देश ईरान में सैन्य तनाव कम करने की कोशिश कर रहे
अमेरिका के करीबी तीन खाड़ी अरब देश सऊदी अरब, कतर और ओमान ईरान पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। ये डिप्लोमैटिक लेवल पर एक्टिव हैं, क्योंकि ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक लोकल अधिकारी ने CNN को बताया कि इन देशों को डर है कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ेगा। सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।
