आईआरसीटीसी घोटाले में लालू-तेजस्वी को बड़ा झटका, दिल्ली HC का केस पर रोक से इनकार

आईआरसीटीसी घोटाले में लालू-तेजस्वी को बड़ा झटका, दिल्ली HC का केस पर रोक से इनकार

आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार के सीएम रहे लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि वह उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे पर रोक नहीं लगाएगा. हालांकि अदालत ने ये भी कहा कि अधीनस्थ अदालत अगले से अगले सप्ताह गवाहों से जिरह कर सकती है. तब तक आरोप तय करने के अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ लालू-तेजस्वी की याचिकाओं पर फैसला कर लेगी.

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की ओर से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि पिछली बार कोर्ट ने आरोप तय करने के खिलाफ वर्तमान याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान केस पर रोक लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के लिए आज का दिन निर्धारित किया था. गवाहों की जांच के बाद अधीनस्थ अदालत गवाहों से जिरह की कार्यवाही शुरू करेगी.

मुख्य जांच होने दीजिए, मैं उन पर रोक नहीं लगा रही

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, मुख्य जांच होने दीजिए. मैं उन पर रोक नहीं लगा रही हूं. रोक के मुद्दे पर पहले फैसला करने के बजाय अगले सप्ताह इस मामले पर अंतिम फैसला करेंगी. अदालत ने याचिकाओं पर जल्द फैसला सुनाने का संकेत देते हुए सीबीआई के वकील से कहा कि वो अगले सप्ताह जिरह पर जोर ना दें.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अगले से अगले सप्ताह जिरह शुरू करें. जिरह पर जोर न दें. आप जिनसे चाहें, पूछताछ कर सकते हैं. बता दें कि बीते साल 13 अक्टूबर को अधीनस्थ अदालत ने लालू, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के अपराधों के लिए आरोप तय किए थे.

मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है: लालू यादव

कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में जमीन और शेयरों का लेन-देन संभवतः रांची और पुरी में रेलवे के होटलों में प्राइवेट हिस्सेदारी हासिल करने की आड़ में पनपे साठगांठ वाले पूंजीवाद का एक उदाहरण है. इस पर लालू यादव ने कहा था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है. चार्जशीट में कागजात देखने से साफ है कि सीबीआई ने ना तो कोई दस्तावेजी या मौखिक सबूत पेश किया है, ना ही किसी गवाह का बयान दर्ज किया है.

याचिका में कहा गया है कि एक भी ऐसा दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है, जिससे ये पता चलता हो कि याचिकाकर्ता की आईआरसीटीसी में किसी अधिकारी के साथ टेंडर प्रक्रिया में धांधली करने के लिए कोई बैठक हुई हो या सहमति बनी थी. नोट कथित तौर पर रेलवे में तैनात अधिकारियों द्वारा जारी किए गए थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *