
चांदी की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अचानक तेजी से नीचे आ गई है। ऐसा तब हुआ है, जब अमेरिका ने आयात होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों पर तुरंत कोई अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) नहीं लगाया है। चांदी की कीमत में 7.3% तक की गिरावट आई है, और सोने के भाव भी गिरे हैं। पिछले चार दिनों में 20% से अधिक की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली भी की है, जिससे गिरावट आई।
बता दें भारत के सर्राफा बाजारों में बुधवार को चांदी 14480 रुपये उछलकर 277512 रुपये प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर बंद हुई थी। आईबीजेए द्वारा जारी रेट के मुताबिक सोना भी 1731 रुपये उछलकर 142015 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।
टैरिफ को लेकर चिंता कम हुई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे महत्वपूर्ण खनिजों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत करेंगे। उन्होंने आयात पर प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय न्यूनतम मूल्य (प्राइस फ्लोर) का सुझाव दिया है, लेकिन भविष्य में शुल्क लगाने से इनकार नहीं किया है। इससे चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम पर तत्काल टैरिफ की आशंका कम हो गई है।
बाजार में उठा-पटक का दौर हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। बाजार की अस्थिरता दिखाने वाला एक पैमाना (14-दिन का एक्स्पोनेंशियल एवरेज ट्रू रेंज) तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट बाजार के तकनीकी कारकों (जैसे मार्जिन, ऑप्शन हेजिंग) और वास्तविक मांग-आपूर्ति से ज्यादा जुड़ी है।
सोने-चांदी में तेजी के अन्य कारण कई भू-राजनीतिक, आर्थिक और आपूर्ति जोखिमों के चलते निवेशक सोने-चांदी जैसी हार्ड एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। चीन और अमेरिका में जोरदार खरीदारी और वस्तुओं (कमोडिटीज) में निवेश बढ़ने से मांग को समर्थन मिल रहा है। ट्रंप द्वारा फेडरल रिजर्व के खिलाफ दोबारा की गई टिप्पणियों, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और ईरान जैसे मुद्दों ने भी ‘सुरक्षित पनाह’ वाली संपत्तियों की मांग बढ़ाई है।
कीमतों का हाल सिंगापुर में सुबह 10:50 बजे तक, चांदी की कीमत 4.6% गिरकर 88.9020 डॉलर प्रति औंस हो गई। सोना 0.5% टूटकर 4,602.44 डॉलर पर आ गया। प्लैटिनम और पैलेडियम के भाव भी गिरे हैं।
भविष्य के संकेत ताजा सर्वे के मुताबिक, सोने में जनवरी के बाद भी तेजी बरकरार रह सकती है। हालांकि, चांदी और तांबे में भी ऐसी ही तेजी देखी गई, लेकिन अब आपूर्ति की कमी कब तक रहेगी, इसे लेकर निवेशकों की सोच के चलते इन धातुओं में निवेश का प्रवाह कमजोर पड़ने के संकेत हैं।
