सुनाते हैं गाना, बांटते सेंट… प्रयागराज के माघ मेले में चर्चा में ‘सेंट बाबा’, दरबार में भक्तों की लगती भीड़

सुनाते हैं गाना, बांटते सेंट… प्रयागराज के माघ मेले में चर्चा में ‘सेंट बाबा’, दरबार में भक्तों की लगती भीड़

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर अध्यात्मिक और धार्मिक माघ मेला चल रहा है. इस मेले में रोजाना देशभर से लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे है. इन दिनों पूरे माघ मेले में अध्यात्म और भक्ति धारा बह रही है. जैसे महाकुंभ 2025 में बाबाओं के अलग-अलग रूप देखने को मिले रहे थे. ठीक उसी तरह इस बार भी कई साधुसंत अलग रूप में नजर आ रहे हैं. माघ मेले में कई ऐसे अनोखे साधुसंत पहुंचे हैं, जो अपनी वेशभूषा और अनूठी तपस्या से श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं.

माघ मेले मे ऐसे ही एक बाबा चर्चा का विषय बने हुए हैं. इन बाबा का नाम है सेंट बाबा, जो एक नागा संन्यासी हैं. सेंट बाबा माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर दो में अपने सिविर में बैठकर अपने पूरे शरीर में भस्म लगाते हैं. सेंट बाबा आंखों पर काला चश्मा पहनकर धूनी रमाकर अपनी कठोर तपस्या और साधना में पूरा दिन लीन रहते हैं. वहीं सेंट बाबा के दर्शन करने वाले श्रद्धालु भी उनसे आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं. जब कोई भी भक्त उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचता है तो बाबा उसके ऊपर सेंट जिसे हम परफ्यूम और इत्र कहते हैं, छिड़ककर उसे अपना आशीर्वाद देते हैं.

13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

सेंट बाबा कहते है, हम लोग मसान यानी शमशान घाट से ये सेंट लाते है और भक्तों को प्रसाद के रूप में देते हैं. इसलिए मेरा नाम सेंट बाबा पड़ा. बाबा बताते हैं कि वह कहीं भी जाएंगे तो उनके पास हमेशा सेंट से भरा पिटारा रहता है. बाबा का असली नाम बाबा बालक दास उर्फ नारायण भूमि है. बाबा श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़े हुए हैं और गुरु स्थान पंजाब का अमृतसर है. बाबा ने 13 साल की उम्र में ही अपने घर को त्याग दिया और सन्यास धारण कर लिया. बाबा को सन्यासी बने हुए 17 साल हो गए हैं.

भक्तों को कर रहे आकर्षित

यही नहीं सेंट बाबा उर्फ बाबा बालक दास हमेशा अपनी मस्ती में रहते हैं और लोगों को तरह-तरह का भजन भी सुनाते हैं. जीवन की सच्चाई से जुड़े सेंट बाबा ने एक गाना गाते हुए कहा कि फैशन चाहे जितना कर लो,चाहे मार लो सेंट, इस जगत में कोई न परमानेंट. बाबा अपने भजनों और गानों से अपने भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं. बाबा ने कैमरे पर भी गाना सुनाया. बाबा ने बताया कि सेंट लगाने कि वजह यह है कि जो संस्कारिक होगा उसे आत्माएं दूर भागेगी और जो अपना घर छोड़कर संन्यास अपना चुका है उस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. चाहे वो शमशान घाट क्यों न चला जाए.

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