
Samudrik Shastra: सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर पर स्थित तिल केवल त्वचा के निशान नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति के भाग्य, स्वभाव और भविष्य की क्षमताओं का आईना होते हैं. हस्तरेखा विज्ञान में उंगलियों के पोरों पर तिलों की मौजूदगी का विशेष महत्व बताया गया है. तर्जनी उंगली से लेकर सबसे छोटी उंगली पर मौजूद तिल के अलग-अलग संकेत (शुभ-अशुभ) होते हैं. हर तिल का अपना अलग प्रभाव और महत्व बताया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि उंगलियों के पोरों पर तिल के निशान किस बात का संकेत हो सकते हैं, धन लाभ या आर्थिक नुकसान.
तर्जनी उंगली के पोर पर तिल
तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर, जिसे बृहस्पति की उंगली कहा जाता है, हमारे नेतृत्व और महत्वाकांक्षा का प्रतिनिधित्व करती है. इस उंगली के पोरों पर तिल होना जातक की प्रबल नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है. ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे होते हैं और उनमें अधिकार की गहरी समझ होती है. ऐसे लोग प्रबंधन या प्रशासनिक पदों पर सफल होते हैं. इनमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने की तीव्र इच्छा होती है और ये कार्यक्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में सक्षम होते हैं.
मध्यमा उंगली के पोर पर तिल
बीच की उंगली यानी मिडिल फिंगर को शनि की उंगली माना जाता है, जो अनुशासन, न्याय और गंभीरता का प्रतीक है. इस उंगली के पोर पर तिल होना व्यक्ति के अनुशासित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को प्रकट करता है. ऐसे जातक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अत्यंत सजग और विश्वसनीय होते हैं. ये लोग उन कार्यों में बहुत नाम कमाते हैं जहां बारीकियों और संगठन की आवश्यकता होती है. हालांकि, अगर तिल पोर के अंदरूनी हिस्से में हो, तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जातक को पाचन संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सतर्क रहना चाहिए.
अनामिका उंगली के पोर पर तिल
रिंग फिंगर, जिसे अपोलो या सूर्य की उंगली कहते हैं, कला, प्रसिद्धि और भावनाओं से जुड़ी होती है. इस उंगली के जोड़ या पोर पर तिल का होना जातक की कलात्मक और रचनात्मक प्रतिभा की ओर इशारा करता है. ऐसे लोगों का झुकाव संगीत, लेखन, चित्रकला या अन्य ललित कलाओं की ओर अधिक होता है. ऐसे जातक स्वभाव से बेहद रूमानी होते हैं और अपने रिश्तों को बहुत अधिक महत्व देते हैं. सुंदरता के प्रति इनका नजरिया दूसरों से भिन्न और समृद्ध होता है.
कनिष्ठा उंगली के पोर पर तिल
सबसे छोटी उंगली, जिसे बुध की उंगली कहा जाता है, संचार, व्यापार और बुद्धि का कारक है. यहां तिल होने का अर्थ है कि जातक के पास अद्भुत संचार कौशल है. ऐसे लोग वाक्पटु होते हैं और अपनी बातों से किसी का भी दिल जीत लेते हैं. ऐसे लोग सेल्स, मार्केटिंग, पत्रकारिता या जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में ये लोग असाधारण प्रगति करते हैं. इनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये बदलते परिवेश में खुद को बहुत जल्दी ढाल लेते हैं और हर परिस्थिति को कुशलता से संभालते हैं.
