
नई दिल्ली: नासा का सबसे महत्वाकांक्षी ‘मार्स सैंपल रिटर्न’ (MSR) मिशन अब आधिकारिक तौर पर दम तोड़ चुका है. अमेरिकी सीनेट ने एक नए खर्च बिल को मंजूरी दी है जिसने इस मिशन के बजट को पूरी तरह खत्म कर दिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि मंगल ग्रह पर जीवन के जो सबसे पुख्ता सबूत पर्सिवरेंस रोवर ने जुटाए थे, वे अब वहीं धूल फांकते रहेंगे. नासा के पास उन बेशकीमती चट्टानों को धरती पर वापस लाने के लिए अब पर्याप्त फंड नहीं बचा है. दूसरी ओर चीन अपने ‘तियानवेन-3’ मिशन के साथ इस रेस में अमेरिका को पछाड़ने के लिए तैयार है. अब दुनिया को मंगल की मिट्टी देखने के लिए बीजिंग की ओर उम्मीद से देखना होगा.
नासा का मार्स सैंपल रिटर्न मिशन अचानक बंद क्यों हुआ?
मंगल ग्रह से मिट्टी के नमूने वापस लाना हमेशा से एक बेहद महंगा और पेचीदा काम रहा है. नासा के इस प्रोग्राम में लगातार देरी हो रही थी और इसका खर्च भी आसमान छू रहा था. जनवरी 2025 में एक स्वतंत्र समीक्षा बोर्ड ने इसके बजट का नया अनुमान लगाया था. इस रिपोर्ट में बताया गया कि इस मिशन की लागत 11 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. साथ ही नमूने 2040 से पहले धरती पर वापस आने की कोई उम्मीद नहीं थी. इतने लंबे समय और भारी खर्च को देखते हुए अमेरिकी सांसदों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं.
संसद की नई रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि वे मौजूदा प्रोग्राम का समर्थन नहीं करते हैं. नासा ने लागत कम करने के लिए कई नए विकल्पों पर भी विचार किया था. इनमें एक व्यावसायिक विकल्प भी शामिल था जिसकी लागत लगभग 7 अरब डॉलर आ रही थी. नासा को 2026 के अंत तक इस पर अंतिम फैसला लेना था. लेकिन बजट की कमी ने इन सभी योजनाओं पर पानी फेर दिया है. अब यह मिशन एक अधूरा सपना बनकर रह गया है.
क्या मंगल ग्रह पर जीवन के सबूत हमेशा के लिए खो गए हैं?
पर्सिवरेंस रोवर पिछले काफी समय से मंगल की सतह पर खुदाई कर रहा है. इसने अब तक 30 से अधिक महत्वपूर्ण भूगर्भीय नमूने इकट्ठा कर लिए हैं. इनमें से एक नमूने को नासा ने मंगल पर जीवन का अब तक का ‘सबसे स्पष्ट संकेत’ बताया था.
वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि इन पत्थरों की जांच से प्राचीन जीवन के राज खुलेंगे. लेकिन अब ये सभी नमूने मंगल की सतह पर ही पड़े रह जाएंगे. नासा के पास इन्हें उठाने के लिए रॉकेट भेजने का पैसा नहीं है.
यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका है जो दशकों से इस पल का इंतजार कर रहे थे. पर्सिवरेंस ने अपना काम पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ किया था. उसने मंगल की जेजेरो क्रेटर वाली जगह से अद्भुत नमूने जुटाए थे.
इन नमूनों में सूक्ष्मजीवों के अवशेष होने की प्रबल संभावना जताई गई थी. बिना इन नमूनों के हम कभी यह नहीं जान पाएंगे कि क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं.
चीन का तियानवेन-3 मिशन क्या अमेरिका से पहले मंगल की मिट्टी धरती पर लाएगा?
अमेरिका के पीछे हटने से अब चीन के लिए रास्ता बिल्कुल साफ हो गया है. चीन का तियानवेन-3 मिशन अब बिना किसी बड़े कॉम्पिटिशन के आगे बढ़ रहा है. चीन ने अपने इस मिशन को 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चीन 2031 तक नमूने वापस लाने का दावा कर रहा है. हालांकि चीन के नमूने नासा जितने विविधतापूर्ण नहीं होंगे. चीन एक आसान जगह से कम नमूने इकट्ठा करने की योजना पर काम कर रहा है.
अगर यह मिशन सफल होता है तो चीन अंतरिक्ष की इस बड़ी रेस को जीत जाएगा. बीजिंग ने अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ाया है. उनके पास इस मिशन के लिए स्पष्ट बजट और सटीक समय सीमा मौजूद है. नासा की जटिल तकनीक के मुकाबले चीन एक सरल और प्रभावी तरीका अपना रहा है.
