
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को इस यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में जबरदस्त गर्मजोशी और वह ‘खास दोस्ती’ देखने को मिली, जो अब भारत और यूएई के रिश्तों की पहचान बन चुकी है। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तीन बेहद अहम समझौतों (लेटर ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर किए हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम करने का फैसला किया है। इसके अलावा, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी है। भारतीय संस्था इन-स्पेस (IN-SPACe) और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच एक समझौता हुआ है, जिसका मकसद स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करना है। इस पहल के तहत दोनों देश मिलकर नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट बनाने की फैक्ट्रियां, संयुक्त अंतरिक्ष मिशन और स्पेस एकेडमी या ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेंगे।
धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल
तीसरा और सबसे बड़ा निवेश समझौता गुजरात के धोलेरा को लेकर हुआ है। विदेश सचिव ने इसे एक ‘मेगा पार्टनरशिप’ बताया है, जिसके तहत यूएई गुजरात के धोलेरा में बन रहे ‘स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन’ के विकास में भागीदार बनेगा। इस समझौते के बाद धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, विमानों की मरम्मत के लिए एमआरओ (MRO) सेंटर, नया बंदरगाह (ग्रीनफील्ड पोर्ट) और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
डिजिटल डेटा एंबेसी बनाने की तैयारी
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया, “दोनों पक्षों ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में पार्टनरशिप पर विचार करने का फैसला किया है, जिसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट, साथ ही एडवांस्ड रिएक्टर सिस्टम, न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑपरेशन, मेंटेनेंस और न्यूक्लियर सेफ्टी में सहयोग शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया गया। UAE की पार्टनरशिप से भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहयोग करने का फैसला किया गया। UAE भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा। UAE फरवरी 2026 में भारत द्वारा आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में भी उच्च स्तर पर भाग लेगा। दोनों पक्ष डिजिटल या डेटा एम्बेसी स्थापित करने की संभावना पर भी विचार करेंगे। यह एक अपेक्षाकृत नई अवधारणा है, लेकिन यह देखने के लिए काम किया जाएगा कि इन्हें आपसी मान्यता प्राप्त संप्रभुता समझौतों के तहत कैसे स्थापित किया जा सकता है…।”
