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शकरकंद का सेवन सर्दियों में लोग खूब करते हैं। इस मौसम में लोग इसे भूनकर, उबालकर या चाट बनाकर खाते हैं। यह जड़ वाली सब्जी सिर्फ खाने में ही टेस्टी नहीं लगती है बल्कि यह पोषक तत्वों का भंडार भी है। यह फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो इम्यूनिटी बढ़ाती है, पाचन सुधारती है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है। लेकिन अजकल बाजार में केमिकल वाले शकरकंद खूब बिक रहे हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। भारत में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर नजर रखने वाली संस्था FSSAI ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया है और बताया है कि कैसे आप केमिकल वाले शकरकंद की पहचान कर सकते हैं?
क्या कहा FSSAI ने?
FSSAI का मानना है कि शकरकंद में अक्सर रोडामाइन बी नामक रंग मिलाया जाता है। यह एक सिंथेटिक डाई है, जिसका उपयोग कपड़ा और लैब में किया जाता है। कारोबारी शकरकंद की बढ़ती डिमांड की वजह से इसे ज्यादा रंगीन या अच्छा दिखाने के लिए इस केमिकल का इस्तेमाल करते है।
कैसे करें केमिकल वाले शकरकंद की पहचान?
केमिकल वाले शकरकंद की पहचान करने के लिए रूई का एक फाहा लें और उसे पानी में भिगो लें। अब रूई से शकरकंद की बाहरी सतह को रगड़ें। अगर रूई का रंग नहीं बदलता है, तो शकरकंद मिलावटी नहीं है। लेकिन अगर रूई पर रंग लग जाए, तो समझ लें कि शकरकंद में मिलावट है। आप डयरेक्ट शकरकंद को पानी में भिगोकर या रगड़कर भी देख सकते हैं। अगर पानी का रंग बदले या फिर रगड़ने पर शकरकंद का रंग बदल जाए तो समझ जाइए ये शकरकंद मिलावटी है।
शकरकंद के फायदे
शकरकंद खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। यह पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आँखों की रोशनी ठीक रखने, वजन नियंत्रित करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार है क्योंकि यह फाइबर, विटामिन ए और सी, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
