
नई दिल्ली: आईटी सेक्टर में सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए आईटी जॉब छोड़ने का फैसला कई बार भारी पड़ सकता है. ऐसा ही दर्द एक टेक प्रोफेशनल ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसकी पोस्ट अब वायरल हो रही है. इस डेवलपर के पास जावा बैकएंड डेवलपमेंट में 6.5 साल का अनुभव था और वे स्प्रिंग बूट व माइक्रोसर्विसेज जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी पर काम कर चुके थे.
बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्होंने बैंकिंग, ईपीएफओ और पीजीटी कंप्यूटर साइंस जैसी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपनी स्थिर आईटी नौकरी छोड़ दी. डेवलपर ने बताया कि उन्होंने एक राज्य स्तरीय लिखित परीक्षा भी पास कर ली थी लेकिन 2024 के अंत में नियमों में अचानक बदलाव कर दिया गया.
क्या आए नए नियम?
नए नियमों के तहत एमटेक और बीएड अनिवार्य कर दिए गए. इसका मतलब था कि बिना नौकरी की गारंटी के उन्हें तीन से चार साल और पढ़ाई करनी पड़ती. इसी दौरान वे करीब ढाई साल तक आईटी सेक्टर से बाहर हो चुके थे.
दिसंबर 2024 में उन्होंने दोबारा आईटी में वापसी का फैसला किया. अप्रैल 2025 से उन्होंने गंभीरता से जॉब के लिए आवेदन शुरू किए. लेकिन यहीं से असली संघर्ष शुरू हुआ. डेवलपर के अनुसार जैसे ही वे इंटरव्यू में अपने 2.5 साल के गैप की बात करते, कई रिक्रूटर्स सिर्फ दो मिनट में कॉल खत्म कर देते थे.
कितने इंटरव्यू दिये ?
6.5 साल का अनुभव होने के बावजूद उनका प्रोफाइल नजरअंदाज किया जाने लगा. अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच उन्होंने करीब 30 से 40 इंटरव्यू दिए. अधिकतर बार वे टेक्निकल राउंड आसानी से क्लियर कर लेते थे लेकिन मैनेजर या क्लाइंट राउंड में गैप सामने आते ही रिजेक्शन मिल जाता था. इंटरव्यू लेने वालों को लगता था कि उनका प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस अब ताजा नहीं है.
डेवलपर ने क्या लिखा?
डेवलपर ने लिखा कि लंबा गैप सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सैलरी ग्रोथ पर भी गहरा असर डालता है. करीब ढाई साल की मेहनत के बाद जनवरी 2026 में हालात बदले. रिक्रूटर्स के कॉल आने लगे और फाइनल राउंड क्लियर होने लगे. आखिरकार उन्हें लगातार दो जॉब ऑफर मिले.
by in
इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी परेशानियां साझा कीं. किसी ने लेऑफ के बाद गैप की बात कही तो किसी ने सालों से बेरोजगार होने का दर्द बताया.
