‘संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़ना गलत’, अविमुक्तेश्वरानंद मामले में स्वामी निश्चलानंद ने सरकार को दिखाया आईना

‘संतों से मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़ना गलत’, अविमुक्तेश्वरानंद मामले में स्वामी निश्चलानंद ने सरकार को दिखाया आईना

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का मामला गरमाता जा रहा है. हिंदू समुदाय के लोग साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर खींचने की घटना को शर्मनाक बता रहे हैं. अब इस मामले को लेकर पुरी पीठ शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज की प्रतिक्रिया आई है.

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने माघ मेले में स्थित अपने शिविर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उपजे विवाद को गलत बताया है. उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना लाडला बताया है. उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर उन्हें खींचना बिल्कुल गलत है. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य हों या फिर कोई और, यह बात सभी पर लागू होती है. सभी को स्नान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.

सारा ध्यान नागा साधुओं के स्नान पर

शंकराचार्य ने आगे कहा कि कुंभ में शंकराचार्य स्नान करें या न करें, शासन तंत्र को इससे कोई मतलब नहीं होता है. उनका सारा ध्यान नागा साधुओं के स्नान पर ही होता है. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. सरकार को सभी का ध्यान रखना चाहिए. खासकर साधु-संतों का भी विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए. उन्होंने मीडियाकर्मी के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मुझे जहां तक पता है कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने अपने जीवनकाल में दो दंडी स्वामी बनाए थे. हालांकि वे भी अपने को ज्योर्ति और द्वारका मठ का शंकराचार्य कहते थे.

संतों के बंटने पर किए सवाल पर दिया जवाब

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर संतों के बंटने पर किए सवाल पर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि वे स्वयं कह चुके हैं कि श्रृंगेरी के शंकराचार्य ने उनका अभिषेक किया. द्वारिका पीठ के शंकराचार्य उनके गुरु भाई हैं. उनको तो अविमुक्तेश्वरानंद को समर्थन प्राप्त ही होगा. उन्होंने कहा कि मेरे पास जब यह प्रकरण आएगा तो जवाब दूंगा. यह भी कहा कि अगर मैंने अभी कुछ निर्णय ले लिया और कोर्ट का निर्णय कुछ और आया तो यह मेरे पद का अपमान होगा. कोर्ट में यह मामला कौन ले गया, इस पर भी विचार करना चाहिए.

शंकराचार्यों के लिये कोई व्यवस्था नहीं

पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि अविमुक्तेश्वारनंद मेरे पास आते तो मैं उन्हें बताता कि उन्हें क्या करना चाहिए. कुछ दिन पहले वो इधर से जा रहे थे, तो मेरे शिविर के सामने रुककर मुझे दडंवत किया. कहा कि मेरे पास वो आएं तो उन्हें बता देता कि क्या करना चाहिए, ताकि मुंह कि न खानी पड़े. उन्होंने आगे कहा कि शासन तंत्र की ये कमी है, कुंभ में नागा साधु स्नान कर सकते हैं. शंकराचार्यों के लिये कोई व्यवस्था नहीं होती. शंकराचार्य तो कुंभ के अवसर पर भी शासन तंत्र द्वारा उपेक्षित होते हैं.

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