‘मां ठंड से बच कर रहना’… सुबह फोन पर बात की, शाम को बेटा शहीद हो गया; हरे राम कुंवर की वीरता बताते रो पड़ा भाई

‘मां ठंड से बच कर रहना’… सुबह फोन पर बात की, शाम को बेटा शहीद हो गया; हरे राम कुंवर की वीरता बताते रो पड़ा भाई

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में देश सेवा करते हुए भोजपुर जिले के वीर सपूत हरे राम कुंवर शहीद हो गए. उनकी शहादत की सूचना मिलते ही पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई, हर आंख नम हो गई. शहीद हरे राम कुंवर बिहार के भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र अंतर्गत नथमलपुर गांव के निवासी थे. वे इंद्रजीत कुंवर के छोटे पुत्र थे और भारतीय सेना में तैनात रहकर मातृभूमि की सेवा कर रहे थे. डोडा जिले में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में उन्होंने वीरगति प्राप्त की. शहादत की खबर मिलते ही नथमलपुर गांव में मातम पसर गया. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं ग्रामीणों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को नमन किया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है.

हरेराम कुंवर ने 2003 में मैट्रिक की पढ़ाई शाहपुर प्रखंड के बरिसवन गांव से पूरी की थी. 2005 में आरा के महाराजा कॉलेज से इंटरमीडिएट किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद वो सेना में भर्ती हो गए. हरे राम कुंवर वर्ष 2009 में दानापुर में बिहार रेजीमेंट में बहाल हुए थे. 2014 में उनका विवाह उदवंतनगर प्रखंड के बिशनपुरा गांव की खुशबू देवी से हुआ था. उनके दो छोटे बेटे हैं, 8 वर्षीय प्रियांशु और 5 वर्षीय पीयूष. पिता की शहादत की खबर से दोनों बच्चे अभी अनजान हैं, लेकिन परिवार का दर्द हर आंख में साफ झलक रहा है. उनके बड़े भाई जय प्रकाश कुंवर गुंडी गांव के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं. जुड़वा बहन रिंकी देवी भाई की शहादत की खबर से बदहवास हैं. सभी अब पार्थिव शरीर के घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं. घर के बाहर बैठे पिता बदहवास दिखाई दिए. पत्नी और मां भी बेसुध थीं उन्हें शहादत की खबर नहीं दी गई थी.

पिता-भाई का झलका दर्द

शहीद जवान के बड़े भाई जयप्रकाश कुमार ने बताया कि गुरुवार की सुबह उसने मां शांति देवी से बात की थी. वो मां को ठंड से बचने की सलाह दे रहा था. बच्चों का हाल जाना, इतना बोलते ही भाई की आंखें नम हो गईं. गुरुवार की दोपहर करीब 3 बजे फोन पर सूचना दी गई की खन्नी टॉप के पास सेना की एक बुलेट प्रूफ गाड़ी ऑपरेशन के दौरान अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गई है. इस भीषण हादसे में हरेराम समेत 10 जवान शहीद हो गए हैं, वो पिछले साल 19 नवंबर को चाचा रंजीत कुंवर के बेटे गौतम की शादी में छुट्टी पर आए थे. भाई की शादी में जमकर मस्ती की. उसके बाद 15 दिसंबर को वापस ड्यूटी पर चेल गए थे.

बच्चों को बनाना चाहते थे डॉक्टर-इंजीनियर

जवान के साले अभिषेक तिवारी ने बताया कि जीजा जी पूरे परिवार को लेकर चलने वाले इंसान थे. अपने दोनों बच्चों को रिटायरमेंट आने के बाद बनारस में पढ़ाना चाहते थे. दोनों बच्चे प्रियांशु (11) और आदर्श (8) काफी ब्रिलियंट हैं. हमेशा अपने पिता के राह पर चलने वाले बच्चे मेडल लाते रहते हैं. वो सेना का शिष्टाचार अपने बच्चों को देते थे. उनका एक ही सपना था कि उनका बेटा एक डॉक्टर तो दूसरा इंजीनियर बने.

(रिपोर्ट- विशाल कुमार/भोजपुर)

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