हवा में कैसे बन जाती है बर्फ? मनाली से कश्मीर तक बर्फबारी, वैष्णो देवी यात्रा स्थगित

हवा में कैसे बन जाती है बर्फ? मनाली से कश्मीर तक बर्फबारी, वैष्णो देवी यात्रा स्थगित

शिमला-मनाली हो या कश्मीर, हर तरफ बर्फबारी शुरू हो गई है. पहाड़ी इलाकों में बर्फ की चादर बिछी हुई है. सबसे ज्यादा असर कश्मीर में दिख रहा है जहां लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सड़क और हवाई यातायात पर सबसे बड़ा असर दिखा. श्रीनगर एयरपोर्ट पर 26 उड़ानें रद्द की गई हैं. जम्मू-कश्मीर नेशनल हाइवे बंद कर दिया गया है. बर्फबारी और तेज हवाओं ने अनंतनाग के हिस्सों में बिजली व्यवस्था को प्रभावित किया है. भारी बारिश और बर्फबारी के कारण वैष्णों देवी की यात्रा को कटरा में रोक दिया गया है.

सर्दी का आधा सीजन बीत चुका है और अब बर्फबारी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अब सवाल है कि हवा में आखिर कैसे बर्फ बन जाती है, क्या कहता है इसका साइंस?

कैसे बनती है बर्फ?

बर्फबारी क्यों और कैसे होती है? आसान भाषा में समझें तो ऐसा तब होता है जब हवा, नमी और ठंड, तीनों एक साथ सही कॉम्बिनेशन में हों. बर्फबारी के लिए पहले बादलों का होना भी जरूरी है. बादल कैसे बनते हैं, पहले इसे समझ लेते हैं.धरती से गरम हवा ऊपर उठती है और वायुमंडल में जाकर ठंडी होती है. हवा में मौजूद पानी की भाप छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है. यही बूंदें यही मिलकर बादल बनाती हैं.

Snowfall Science

शिमला में बर्फबारी.

अमेरिका का नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर कहता है, बर्फ गिरने के लिए वायुमंडल में नमी का होना जरूरी है. यह तापमान पर भी बहुत हद तक निर्भर करती है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह वही तापमान हो जो हमें जमीन पर महसूस होता है. बर्फ तब बनती है जब वायुमंडल का तापमान हिमांक बिंदु (0°C या 32°F) पर या उससे नीचे होता है. यदि जमीन का तापमान हिमांक बिंदु (0°C या 32°F) पर या उससे नीचे है, तो पानी की बूंदें जमकर बर्फ के कण में बदल जाती हैं औरबर्फ जमीन तक पहुंचने लगती है.

हालांकि, यदि परिस्थितियां अनुकूल हों, तो हिमांक बिंदु से ऊपर के तापमान पर भी बर्फ जमीन तक पहुंच सकती है. इस स्थिति में, बर्फ के कण जैसे ही इस उच्च तापमान वाली परत तक पहुंचते हैं, पिघलना शुरू हो जाते हैं. पिघलने से वाष्पीकरण होता है और ठंडक बढ़ती है. जो बर्फ के कण के आसपास की हवा को तुरंत ठंडा कर देती है.

Snowfall In Shimla

पहाड़ों पर बर्फबारी का हाल.

विज्ञान कहता है कि अगर जमीन का तापमान कम से कम 5°C (41°F) हो तो बर्फ नहीं बनती है. हालांकि बर्फबारी के लिए बहुत गर्म मौसम हो सकता है, लेकिन बर्फबारी के लिए बहुत ठंडा मौसम नहीं हो सकता. बर्फ बेहद कम तापमान पर भी गिर सकती है, बशर्ते नमी का कोई स्रोत हो. अंटार्कटिका की शुष्क घाटियां महाद्वीप का सबसे बड़ा बर्फ़-मुक्त भाग है।. शुष्क घाटियां काफ़ी ठंडी होती हैं, लेकिन यहां आर्द्रता बहुत कम होती है, और तेज हवाएं हवा से बची हुई नमी को भी सोख लेती हैं. नतीजा, इस अत्यधिक ठंडे क्षेत्र में बहुत कम बर्फ़बारी होती है.

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