गणतंत्र दिवस परेड की सबसे बेस्ट झांकी कौन, कैसे होता है सेलेक्शन? यहां समझें

गणतंत्र दिवस परेड की सबसे बेस्ट झांकी कौन, कैसे होता है सेलेक्शन? यहां समझें

भारत का गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि दुनिया को भारत की एकता, सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी प्रगति और लोकतांत्रिक परंपरा दिखाने का एक भव्य माध्यम है. हर वर्ष 26 जनवरी को कर्तव्य पथ (पूर्व राजपथ) पर निकाली जाने वाली परेड में देश-भर के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों की झांकियां मुख्य आकर्षण होती हैं. इनमें अनेक रंग, संस्कृति, लोकपरंपराएं, ऐतिहासिक घटनाएं और आधुनिक उपलब्धियां शामिल होती हैं.

कई बार लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इतनी सारी झांकियों में से कुछ राज्यों और विभागों को ही जगह क्यों मिलती है? किन नियमों के तहत चयन किया जाता है? एक झांकी को अप्रूवल मिलने में कितना समय लगता है और विजेता झांकी कैसे तय होती है? आइए, देश के 77 वें गणतंत्र दिवस के बहाने इन सभी सवालों के जवाब सरल और क्रमवार तरीके से समझते हैं.

झांकियों का चयन कौन करता है?

गणतंत्र दिवस के झांकियों की पूरी चयन प्रक्रिया रक्षा मंत्रालय की देखरेख में होती है. मंत्रालय एक उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी बनाता है जिसमें कला और डिजाइन विशेषज्ञ, संस्कृति और इतिहास के जानकार, राष्ट्रीय स्तर के कलाकार, तकनीकी मूल्यांकन विशेषज्ञ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आदि शामिल होते हैं. यही समिति राज्य सरकारों और केंद्रीय विभागों द्वारा प्रस्तावित डिजाइनों का मूल्यांकन करती है.

Republic Day 2026 Tableau

झांकी मंजूरी की प्रक्रिया लंबी और चरणबद्ध होती है.

राज्यों और विभागों की संख्या सीमित क्यों होती है?

भारत एक बहुत बड़ा देश है. इस समय देश में कुल 28 राज्य एवं आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं. अगर सबकी झांकियां शामिल करने का फैसला सरकार कर ले तो गणतंत्र दिवस परेड के लिए जो जगह तय है वह भी कम पड़ेगी और समय तो खैर कम पड़ेगा ही, इसीलिए इसे सीमित रखा जाता है.

गणतंत्र दिवस परेड लगभग ढाई घंटे की होती है जिसमें झांकियों के अलावा सेना, वायु सेना, नौसेना की टुकड़ियां, पैरा-मिलिट्री दस्ते, बैंड, मोटरसाइकिल स्टंट, स्कूली बच्चे, फ्लाई-पास्ट भी शामिल होते हैं. इसलिए हर साल 5060 प्रस्तावों में से केवल लगभग 17 राज्यों और 12-15 मंत्रालयों, विभागों को ही जगह मिल पाती है.

एक झांकी को अप्रूवल की प्रक्रिया कैसी होती है?

झांकी मंजूरी की यह प्रक्रिया लंबी, चरणबद्ध और बहुत तकनीकी होती है. मुख्य चरण कुछ इस प्रकार हैं.

  • प्रारंभिक प्रस्ताव (Initial Concept): हर साल सितंबरअक्टूबर में राज्यों, विभागों को थीम के आधार पर अपना कन्सेप्ट नोट और स्केच भेजना होता है. प्रस्ताव में शामिल होते हैं विषय (Theme), इसका राष्ट्रीय महत्व, प्राथमिक डिज़ाइन/स्केच, टेक्निकल लेआउट, चलित और स्थिर दोनों भागों का विवरण आदि.
  • पहली स्क्रीनिंग: प्रस्ताव मिलने के बाद स्क्रीनिंग कमेटी प्रस्तावित डिज़ाइनों का मूल्यांकन करती है. इसमें यह देखा जाता है कि विषय कितना प्रासंगिक है, क्या यह परेड की थीम से मेल खाता है, क्या यह राष्ट्रीय एकता और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है, क्या डिज़ाइन तकनीकी रूप से संभव है, पहली स्क्रीनिंग के बाद आमतौर पर करीब 3035 प्रस्ताव चुने जाते हैं.
  • मॉडल प्रस्तुति (3D Model): दूसरे चरण में चयनित राज्यों, विभागों को 3D मॉडल बनाकर प्रस्तुत करना पड़ता है. मॉडल में सटीक रंग, आकार, आकृतियाँ और यांत्रिक व्यवस्था दिखानी होती है.
  • संशोधन (Modifications) के सुझाव: कमेटी कई बार कुछ मॉडल में सुधार के सुझाव देती है. कभी-कभी रंग बदले जाते हैं, मूर्तियों का आकार परिवर्तित किया जाता है, डिज़ाइन सरल किया जाता है, तकनीकी खामियों को सुधारा जाता है.
  • अंतिम चयन: कई दौर की बैठकों और मूल्यांकन के बाद अंतिम सूची जारी होती है जिसमें उन राज्यों, विभागों के नाम होते हैं जिनकी झांकियां परेड में शामिल की जा सकती हैं.
  • रिहर्सल और फाइनल अप्रूवल: चयनित झांकियों का मैकेनिकल ट्रायल, मूवमेंट टेस्ट, सुरक्षा परीक्षण, परेड मार्ग पर गति परीक्षण आदि इस अंतिम चरण में किए जाते हैं. अगर सब ठीक हो तो फाइनल अप्रूवल दिया जाता है.

झांकियों का निर्माण कैसे होता है?

कमेटी की अप्रूवल मिलने के बाद राज्य या विभाग के कलाकार, मूर्तिकार, इंजीनियर और डिजाइनर मिलकर झांकी तैयार करते हैं. इसके मुख्य तत्व होते हैं ट्रेलर/चेसिस, पेंटिंग, फाइबर और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां, चलित हिस्से (मैकेनिकल), लाइटिंग और साउंड, डेकोरेशन आदि. निर्माण अक्सर 4560 दिनों तक चलता है. इसके लिए दिल्ली कैंट या राष्ट्रीय राजधानी के किसी और इलाके का चीन भी किया जा सकता है.

झांकी के लिए तय नियम

झांकियों को कुछ प्रमुख नियमों का पालन करना होता है. ये नियम कुछ इस प्रकार हैं. इसमें धार्मिक प्रचार की अनुमति नहीं है. राजनीतिक व्यक्तियों का प्रचार प्रतिबंधित है. झांकी में जीवित नेता की मूर्ति/चित्र नहीं लगाया जा सकता. सटीक ऐतिहासिकता अनिवार्य अंग है. डिज़ाइन में पर्यावरणअनुकूल सामग्री का उपयोग जरूरी है. आकार और ऊंचाई निर्धारित सीमा में करने का नियम है. सुरक्षा और फायर कंप्लायंस आवश्यक एवं अनिवार्य है. सांप्रदायिक सद्भाव का पालन भी किसी भी झांकी की अनिवार्य शर्तों में से एक है.

विजेता झांकी कैसे चयनित होती है?

गणतंत्र दिवस परेड में सर्वश्रेष्ठ झांकी का चयन भी उच्चस्तरीय ज्यूरी द्वारा किया जाता है. इसके लिए कुछ मानदंड तय हैं.

  • विषय की प्रासंगिकता: क्या विषय राष्ट्रीय थीम से मेल खाता है और क्या वह जनता को संदेश देता है?
  • रचनात्मकता और कलात्मकता: रंगों का संतुलन, आकृतियों की सुंदरता, लोक कला का प्रयोग, हस्तशिल्प का स्तर आदि.
  • तकनीकी खूबी: चलित हिस्सों का स्मूथ मूवमेंट, लाइटिंग इफेक्ट्स, मैकेनिकल डिजाइन की क्वालिटी.
  • समग्र प्रस्तुति: संगीत, वेशभूषा, प्रदर्शन—इन सबका सामंजस्य.
  • मौलिकता: डिज़ाइन कितना अनूठा है और क्या यह राज्य/विभाग की विशिष्ट पहचान बताता है.

विजेता श्रेणियां कौन-कौन सी हैं?

पुरस्कार निम्न श्रेणियों में दिए जाते हैं.

  • सर्वोत्तम राज्य, केंद्रशासित प्रदेश की झांकी
  • सर्वोत्तम मंत्रालय, विभाग की झांकी
  • स्पेशल मेंशन (विशेष उल्लेख)
  • लोकप्रियता आधारित पुरस्कार (कभी-कभी ऑनलाइन वोटिंग)

पुरस्कार गणतंत्र दिवस के बाद दिए जाते हैं और विजेता झांकियां अक्सर भारत के अलगअलग शहरों में प्रदर्शनी के लिए भेजी जाती हैं.

गणतंत्र दिवस और झांकियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें

इस सिलसिले में केंद्र सरकार ने नियम बनाए हुए हैं. हर साल सभी राज्यों को मौका नहीं मिलता. यह चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होता है. कोई भी राज्य, विभाग जगह सुनिश्चित नहीं कर सकता. राजनीतिक दबाव से चयन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती क्योंकि मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है. किसी भी झांकी को खारिज भी किया जा सकता है यदि वह नियमों का पालन नहीं करती.

क्यों होता है झांकियों का इतना महत्व?

झांकियां भारत की बहुभाषिक, बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक होती हैं. इनसे पर्यटक आकर्षित होते हैं, राज्यों की ब्रांडिंग होती है, स्थानीय कला और शिल्प अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाते हैं और युवाओं में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ती है.

गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां केवल सजावटी ट्रेलर नहीं होतीं, बल्कि वे भारत की विविधताओं को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देती हैं. झांकियों के चयन की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और तकनीकी होती है, जिसमें कई स्तरों पर मूल्यांकन होता है. विजेता झांकी वह होती है जो न सिर्फ सुंदर हो, बल्कि विचार, तकनीक, संदेश और कलात्मकता—चारों स्तरों पर बेहतरीन प्रदर्शन करे.

इस तरह 17 राज्यों और 13 विभागों की झांकियां अंतिम रूप से परेड में शामिल होती हैं और दुनिया भर के दर्शकों के सामने भारत की आत्मा, इतिहास, संस्कृति और प्रगति को गर्व के साथ प्रस्तुत करती हैं. राज्यों एवं विभागों, मंत्रालयों के झांकियों की संख्या में कभी कमी या कभी संख्या बढ़ाई भी जा सकती है. लेकिन उतनी ही जिससे गणतंत्र दिवस के लिए जो समय तय है और जो स्पेस उपलब्ध है, उसमें कोई दिक्कत न पेश आए.

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