
नई दिल्ली: यूरोपीय संघ (ईयू) के जनरल सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) के नए नियमों का भारत के निर्यात पर बहुत कम असर पड़ेगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उसने बताया कि इन नए नियमों से भारत के कुल यूरोपीय संघ निर्यात का केवल 2.66% प्रभावित होगा। यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। 31 दिसंबर 2028 तक चलेगा। नए नियमों के तहत, कृषि उत्पादों को जीएसपी के दायरे से बाहर कर दिया गया है। गैर-कृषि क्षेत्र में केवल चमड़े के लिए जीएसपी बेनिफिट फिर से शुरू किए गए हैं। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत के निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ईयू ने कुछ उत्पाद श्रेणियों में भारत को जीएसपी से बाहर कर दिया है। भारत और ईयू के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से पहले इसे बड़ा झटका बताया जा रहा था।
ईयू के नए जीएसपी नियमों के तहत, भारत के निर्यात का एक छोटा हिस्सा ही प्रभावित होगा। 2023 में भारत ने ईयू को लगभग 62.2 अरब यूरो का निर्यात किया था। इसमें से केवल 12.9 अरब यूरो ही ईयू के स्टैंडर्ड जीएसपी स्ट्रक्चर के तहत आता था। भारत पहले से ही 12 प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरी में जीएसपी से बाहर हो चुका है। नए नियमों के अनुसार, लगभग 1.66 अरब यूरो का व्यापार जीएसपी व्यवस्था से बाहर हो जाएगा। इससे 2023 के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 11.24 अरब यूरो का व्यापार जीएसपी के तहत योग्य रहेगा। मंत्रालय ने साफ किया, ‘दूसरे शब्दों में नया नियम भारत के यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात का केवल 2.66% प्रभावित करता है।’
यह ‘ग्रेजुएशन’ प्रक्रिया भारत के निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। इसकी समीक्षा ईयू समय-समय पर करता है। मंत्रालय ने कहा, ‘समय के साथ भारत का यह ग्रेजुएट होना उसके निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण है।’
क्या है ईयू जीएसपी की व्यवस्था?
ईयू जीएसपी के तहत तीन स्तर हैं। पहला है स्टैंडर्ड जीएसपी, जो कम और निम्न-मध्यम आय वाले विकासशील देशों के लिए है जो कुछ शर्तों को पूरा करते हैं। भारत इसी स्टैंडर्ड जीएसपी का लाभ उठाता है। दूसरा है जीएसपी प्लस, जो एक विशेष प्रोत्साहन योजना है। इसके लिए देशों को श्रम, मानवाधिकार, पर्यावरण और शासन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को मंजूरी देनी और लागू करना होता है। तीसरा है एवरीथिंग बट आर्म्स (EBA)। इसके तहत सबसे कम विकसित देशों को हथियारों को छोड़कर सभी वस्तुओं पर ड्यूटी-फ्री, कोटा-फ्री पहुंच मिलती है।
नए जीएसपी नियमों के तहत, कृषि उत्पादों को ‘ग्रेजुएट’ नहीं किया गया है। यानी वे जीएसपी के दायरे में बने रहेंगे। गैर-कृषि क्षेत्र में सिर्फ चमड़े के लिए जीएसपी लाभों को फिर से बहाल किया गया है। जिन 13 विशिष्ट जीएसपी श्रेणियों को निलंबित किया गया है, उनमें खनिज उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, वस्त्र, मोती और कीमती धातुएं, कुछ धातुएं, मशीनरी और परिवहन उपकरण शामिल हैं।
FIEO ने भी समझाया फैसले का मतलब
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (फियो) ने इस मामले पर और स्पष्टता दी है। उन्होंने बताया कि भले ही यह रिपोर्ट किया गया है कि भारत के ईयू को होने वाले निर्यात का लगभग 87% हिस्सा ईयू की अधिसूचना में उल्लिखित व्यापक उत्पाद श्रेणियों में आता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय निर्यात का 87% हिस्सा ऊंचे टैरिफ का सामना करेगा। फियो ने यह भी कहा कि इस विस्तार के माध्यम से कोई भी नया उत्पाद जीएसपी से वापस नहीं लिया गया है।
फियो ने समझाया कि ईयू की अधिसूचना व्यापक उत्पाद समूहों का जिक्र करती है। इन समूहों के भीतर कई उत्पाद पहले से ही ईयू के मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) व्यवस्था के तहत जीरो कस्टम्स ड्यूटी के दायरे में आते हैं। इसलिए जीएसपी बेनिफिट्स को वापस लेने से अप्रभावित रहेंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘इन व्यापक श्रेणियों के भीतर कई स्पेसिफिक टैरिफ लाइन अभी भी लागू मूल के नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और शर्तों के अधीन ईयू जीएसपी बेनिफिट के लिए योग्य हैं।’
फियो ने यह भी सलाह दी है कि इस अधिसूचना का भारतीय निर्यात पर व्यावहारिक प्रभाव सीमित है। निर्यातकों को व्यापक उत्पाद श्रेणियों के बजाय टैरिफ-लाइन (एचएस कोड) स्तर पर अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि वे सटीक जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें और जीएसपी बेनिफिट्स का अधिकतम फायदा उठा सकें या संभावित टैरिफ के लिए तैयार रह सकें।
