UGC विवाद से शंकराचार्य तक… PCS अफसर के इस्तीफे से और तेज हुआ संग्राम, अब आगे क्या?

UGC विवाद से शंकराचार्य तक… PCS अफसर के इस्तीफे से और तेज हुआ संग्राम, अब आगे क्या?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी विवाद में देश कई दिनों से उबल रहा है. छात्रों के साथ सियासत और संत समाज तक संग्राम का माहौल है और सबका टारगेट एक ही है…सरकार. सोमवार को ये विवाद अचानक हुए एक इस्तीफे की वजह से फिर चर्चा में हैं. यूपी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने त्यागपत्र दे दिया, जिस पर खूब राजनीति हो रही है. सवाल पूछे जा रहे हैं. अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे की 2 वजह बताई हैं.

इस्तीफे की पहली वजह है शंकराचार्य वाला विवाद, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ बदसलूकी हुई. साधु-संतों के साथ अन्याय हो रहा है. इसमें उन्होंने विशेष जाति के साथ भेदभाव वाला एंगल भी जोड़ा है. इस्तीफे की दूसरी वजह है कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के लिए UGC का नया नियम, जिसे वो जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ मानते हैं. ये नियम क्या है और विवाद क्यों है? इसमें विस्तार से समझेंगे. पहले ये जानते हैं कि अलंकार अग्निहोत्री ने क्या कहा है.

सरकार और UGC ने क्या कहा?

अग्निहोत्री का तर्क है कि दोनों घटनाएं सिर्फ प्रशासनिक या शैक्षणिक निर्णय नहीं हैं बल्कि समाज के बड़े वर्ग की गरिमा और अधिकारियों से जुड़ी हुई हैं. हालांकि केंद्र सरकार और UGC ने इन नियमों का बचाव करते हुए कहा है कि ये सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हैं. ताकि कॉलेज कैंपस में भेदभाव को रोका जा सके लेकिन अलंकार अग्निहोत्री ने UGC के नए नियम को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं.

उनकी एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें ये संदेश दिया गया है कि UGC का नया नियम काला कानून है. इसे वापस लिया जाना चाहिए. इस पर हैशटैग यूजीसी रोलबैक भी लिखा है. उन्होंने यूपी के राज्यपाल, मुख्य चुनाव आयुक्त और उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी को चिट्ठी लिखी, जिसमें UGC के नए नियमों को रॉलेट ऐक्ट जैसा बताया है.

छात्रों को शोषित करने वाले प्रावधान

उन्होंने कहा कि UGC के प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं. सामान्य वर्ग के छात्रों को शोषित करने वाले प्रावधान हैं. प्रावधानों से साजिशों का जन्म होगा. सामान्य वर्ग की छात्रा का शारीरिक शोषण भी संभव है. उनका कहना है कि सामान्य वर्ग का पक्ष रखने वाला कोई नहीं है इसलिए अब वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का वक्त आ चुका है. उनकी एक और तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें उन्होंने कई और सवाल उठाए हैं.

इतना ही नहीं सरकारी दफ्तर में अपने नाम के आगे वो ‘RESIGNED’ लिखते हुए दिख रहे हैं. अलंकार अग्निहोत्री 2019 बैच के यूपी के PCS अधिकारी हैं. PCS अफसर बनने से पहले 10 साल तक आईटी सेक्टर में नौकरी कर चुके हैं. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने बरेली के डीएम से मुलाकात की. ये मुलाकात डीएम आवास पर हुई.

बंधक बनाकर रखा गया: अग्निहोत्री

मीटिंग के बाद अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास पर 20 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया. उनके खिलाफ अपशब्द कहे गए. उनका ये भी इल्जाम है कि डीएम को लखनऊ से किसी का फोन आया था. उनसे कहा गया है कि दो घंटे के अंदर वो आवास खाली करें. इस मुलाकात के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. इस बीच समाजवादी पार्टी के नेता माता प्रसाद पांडे ने उनसे फोन पर बात की.

ये मामला अब सिर्फ बयानों और तर्कों तक सीमित नहीं है. विरोध अब सड़कों तक पहुंच चुका है. प्रदर्शन और घेराव तक पहुंच चुका है. सवर्ण आर्मी नाम के संगठन ने मंगलवार को दिल्ली में UGC का घेराव करने का ऐलान किया है. सवर्ण समाज की दलील है कि यूजीसी का नया नियम भले ही समानता के नाम पर लाया गया लेकिन ये समानता के खिलाफ है.

आखिर UGC का ये नियम क्या हैं?

अब सवाल है कि आखिर UGC का ये नियम क्या हैं? जिस पर इतना विवाद हो रहा है, जिसे जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ बताया जा रहा है. दरअसल, इसी महीने उच्च शिक्षा संस्थानों में UGC Equity Regulations 2026, लागू किया गया है. इसका उद्देश्य कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में भेदभाव खत्म करना है. UGC चाहता है कि किसी भी छात्र के साथ उसकी जाति, जेंडर या बैकग्राउंड की वजह से बुरा बर्ताव ना हो.

  • UGC के नए नियम के अनुसार सरकारी कॉलेज हो या प्राइवेट यूनिवर्सिटी, हर जगह एक ‘Equity Cell’ बनाना जरूरी होगा. इसमें कम से कम एक सदस्य SC, एक ST, एक OBC, एक महिला और एक दिव्यांग समुदाय से होना अनिवार्य है.
  • अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है तो वो अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है.
  • किसी भी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर कमेटी की बैठक होनी चाहिए. इस पर 15 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी. दोषी पाए जाने पर एक्शन लिया जा सकता है.
  • अगर संस्थान ये नियम नहीं मानती या इसका पालन नहीं करती तो संस्थान पर भी एक्शन होगा. यूजीसी उस कॉलेज का फंड रोक सकता है.
  • डिग्री प्रोग्राम को रोका जा सकता है. ऑनलाइन कोर्स पर भी ब्रेक लग जाएगा. इतना ही नहीं संस्थान की मान्यता भी रद्द हो सकती है.

अब इन नए यूजीसी नियमों का समर्थन और विरोध करने वालों के अपने-अपने तर्क हैं.

  1. नए नियमों में OBC को भी ‘जातिगत भेदभाव’ की कैटेगेरी में रखा गया है. समर्थन करने वालों का तर्क है कि OBC छात्रों से भी जातिगत भेदभाव हो सकता है.
  2. विरोध करने वाले कह रहे हैं कि इस नियम से सामान्य वर्ग के छात्र स्वाभाविक अपराधी बना दिए जाएंगे. जबकि समर्थन वाले कह रहे हैं…किसी भी तरह छात्रों को भेदभाव से बचाना जरूरी है.
  3. विरोधियों के मुताबिक, नए कानून में सामान्य श्रेणी के छात्र आरोपी हो सकते हैं तो पीड़ित क्यों नहीं. जबकि समर्थक कह रहे हैं कि ये कानून छात्रों में बराबरी का व्यवहार सुनिश्चित करेगा.
  4. नाराज लोगों का कहना है कि ऐसे एकतरफा नियमों ने आरोपी और पीड़ित की जाति पहले ही तय कर दी है. जबकि समर्थक इसे छात्रों की समानता और सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं.
  5. जनरल कैटेगरी के छात्रों-कर्मचारियों का कहना है- ये नियम एकतरफा है. इसका इस्तेमाल साजिश के तहत भी हो सकता है. जबकि समर्थक कह रहे हैं कि इससे भेदभाव की सही तस्वीर पता चल जाएगी.
  6. विरोधियों का तर्क है अगर किसी को फंसाना हो तो बस इतना कहना होगा कि ये मुझसे भेदभावपूर्ण बर्ताव कर रहा है. वहीं समर्थक इसे न्याय सुनिश्चित करने का निष्पक्ष तरीका बता रहे हैं.
  7. एक चिंता इस बात की भी है कि जिसके खिलाफ शिकायत की जाएगी, उस छात्र का करियर खराब हो सकता है. वहीं समर्थक कह रहे हैं कि इन नियमों से भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों की संख्या कम होगी.
  8. विरोध करने वालों का डर ये है कि झूठी शिकायत करने वालों पर एक्शन लेने का कोई प्रावधान नहीं है. वहीं इन नियमों के समर्थक इसे भेदभाव के खिलाफ बिना डरे आवाज उठाने की हिम्मत से जोड़कर देख रहे हैं.

मुआवजे का कोई प्रोविजन नहीं

लेकिन सवाल है कि अगर झूठी शिकायत के जरिए किसी की मानसिक प्रताड़ना होगी और बाद में वो निर्दोष साबित हुआ तो उसके लिए प्रावधान खामोश है. मुआवजे का कोई प्रोविजन नहीं है. वैसे अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे की एक वजह शंकराचार्य के अपमान को भी बताया है. इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उनकी तारीफ की. ये कहा है कि पूरा देश आक्रोशित है. प्रयागराज में धरनास्थल पर उन्होंने इस्तीफे की खबर संतों के सामने पढ़ते हुए ये बातें कहीं.

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