
उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के इस्तीफे का दौर जारी है. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरोध में एक इस्तीफा हुआ है. ये इस्तीफा अयोध्या जिले में GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने दिया है. बता दें कि एक दिन पहले ही बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने पांच पन्नों का रिजाइन लेटर लिख तुरंत पद छोड़ दिया था. यही नहीं शाम तक उन्होंने अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया था. अपने इस्तीफे में अलंकार अग्निहोत्री ने माघ मेले में शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार और यूजीसी को अहम मुद्दा बताया था.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेजे गए इस्तीफे में GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने लिखा कि, “विगत कई दिनों से प्रयागराज में उत्तर प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी से आहत था. मैं उत्तर प्रदेश राज्य का एक साधारण कर्मचारी हूं. उत्तर प्रदेश सरकार से हमें आजीविका प्राप्त है. उस आजीविका से मेरे परिवार का लालन-पालन होता है.”
CM योगी पर अमर्यादित टिप्पणी की
प्रशांत कुमार सिंह ने आगे लिखा कि, “मेरा राजकीय धर्म है कि अपने प्रदेश सरकार व सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध यदि कोई अनर्गल बात करता है तो उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी नियमावली का पालन करते हुए उसका विरोध किया जाए. मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी को राष्ट्र, संविधान व लोकतंत्र के विरुद्ध मानता हूं. अतः ऐसी स्थिति में सरकार के पक्ष में और अभिमुक्तेश्वरानंद के विरोध में मैं अपना त्यागपत्र दे रहा हूं.”
भोले-भाले अधिकारियों को सरकार के खिलाफ खड़ा कर रहे
| Ayodhya, UP | On his resignation, Prashant Kumar Singh, GST Commissioner, Ayodhya, says, “In favour of the government and to oppose Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand, I have resigned. For the last 2 days, I was deeply hurt by his baseless allegations against our CM
— ANI (@ANI)
प्रशांत कुमार सिंह ने आगे लिखा कि, “शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध अनर्गल बात की जा रही है, जिसे मैं राष्ट्र, संविधान व लोकतंत्र के विरुद्ध मानता हूं. अतः ऐसी स्थिति में सरकार के पक्ष में और अभिमुक्तेश्वरानंद के विरोध में मैं अपना त्यागपत्र दे रहा हूं. अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा भोले-भाले अधिकारियों को प्रलोभन देकर सरकार के विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है, जो निश्चित रूप से भारत के संविधान, भारत के लोकतंत्र के विरुद्ध एक साजिश है.”
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समाज में जातिवाद का जहर घोल रहे शंकराचार्य
विगत कई दिनों से अभिमुक्तेश्वरानंद द्वारा समाज में जातिवाद का जहर घोला जा रहा है और देश व प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है. प्रशांत कुमार सिंह ने लिखा कि, “मैं एक सरकारी सेवक के साथ-साथ एक संवेदनशील व्यक्ति भी हूं. राष्ट्र, संविधान, राज्य, लोकतंत्र, लोकतांत्रिक पद्धति से चुने हुए प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के विरुद्ध कोई अपमानजनक टिप्पणी होगी तो मन अवश्य आहत होगा. एक राष्ट्र प्रेमी, राज्यप्रेमी व संविधान प्रेमी के अंदर यह भावना होनी ही चाहिए.”
