यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, फरवरी महीने में…..

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, फरवरी महीने में…..

यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका लगा है। फरवरी का बिजली बिल 10 प्रतिशत बढ़कर आएगा। यूपी पॉवर कॉरपोरेशन ने ईंधन अधिभार शुल्क में अब तक की सबसे बड़ी वसूली का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, इस इजाफे को दोषयुक्त और संदिग्ध बताते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से हस्तक्षेप करने के लिए लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल किया है। साथ ही अब तक हुई हर महीने की गणना के जांच की भी मांग की है।

नियामक आयोग ने ईंधन और ऊर्जा खरीद में लगे अतिरिक्त शुल्क की भरपाई बिजली बिल में किए जाने की व्यवस्था बीते साल जनवरी में दी थी। तब तय किया गया था कि हर महीने की ऊर्जा व ईंधन खपत की रकम चौथे महीने के बिल में वसूली जाएगी। पावर कॉरपोरेशन ने कहा है कि नवंबर में हुए अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए वह फरवरी के बिजली बिलों में दस प्रतिशत रकम का इजाफा करेगा। अब इस गणना पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल है कि अक्तूबर में अधिभार की दर जब नकारात्मक थी तब वह नवंबर में इतनी ज्यादा कैसे हो सकती है कि दस प्रतिशत इजाफा करना पड़े। पावर कॉरपोरेशन का दावा है कि नवंबर 2025 में उसने 5.79 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी, जबकि विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत टैरिफ में यह दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट है। इसी अंतर के आधार पर ईंधन अधिभार शुल्क लगाकर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किए गए गए हैं। कॉरपोरेशन के मुताबिक अंतर की भरपाई के लिए उसे बिल में 12.38 प्रतिशत का इजाफा करना चाहिए था, लेकिन आयोग ने आदेश में अधिकतम 10 प्रतिशत ही इजाफा करने की व्यवस्था दी है। इसलिए ही दस प्रतिशत इजाफा किया जा रहा है।

मई से ज्यादा महंगी बिजली नवंबर में खरीदी
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नवंबर जैसे सामान्य मांग वाले महीने में इतनी महंगी बिजली खरीद पूरी तरह से संदेहास्पद है। इससे बिजली खरीद के आंकड़ों में गंभीर गड़बड़ी का इशारा है। मई 2025 में जब प्रदेश में भीषण गर्मी, बिजली संकट और रिकॉर्ड मांग थी, उस समय भी पावर कॉरपोरेशन ने 4.76 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी थी। ऐसे में नवंबर 2025 जैसे सामान्य महीने में 5.79 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की खरीद कैसे हुई?

जांच पूरी होने तक वसूली पर लगाई जाए रोक
अवधेश ने कहा कि नियामक आयोग से मांग की गई है कि बिजली खरीद की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। जब तक जांच पूरी नहीं होती है तब तक बिजली बिल में 10 प्रतिशत इजाफा न किया जाए। अगर मामले में कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है तो उसको दंडित किया जाए और जवाबदेही तय की जाए।

इस महीने इतनी हुई वसूली महीना ईंधन अधिभार शुल्क
अप्रैल 1.24 प्रतिशत

मई -2 प्रतिशत

जून 4.27 प्रतिशत

जुलाई 1.97 प्रतिशत

अगस्त 0.24 प्रतिशत

सितंबर 2.34 प्रतिशत

अक्तूबर -1.63 प्रतिशत

नवंबर 1.83 प्रतिशत

दिसंबर 5.56 प्रतिशत

जनवरी -2.33 प्रतिशत

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