वाराणसी SIT का बड़ा एक्शन: 2000 करोड़ के कफ सिरप घोटाले में 3 वांटेड तस्करों को दबोचा, दुबई कनेक्शन का खुलासा..

वाराणसी SIT का बड़ा एक्शन: 2000 करोड़ के कफ सिरप घोटाले में 3 वांटेड तस्करों को दबोचा, दुबई कनेक्शन का खुलासा..

वाराणसी। मुख्य संवाददाता वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की एसआईटी (SIT) टीम ने 2000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित कोडीनयुक्त कफ सीरप तस्करी मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य रणनीतिकार और 50 हजार रुपये के इनामी तस्कर विकास सिंह सहित तीन भगोड़े आरोपियों को सिद्धार्थनगर के पास नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था और ये तीनों अवैध रूप से सीमा पार कर नेपाल भागने की फिराक में थे।

गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल
विकास सिंह (निवासी: नर्वे, आजमगढ़) – गिरोह का मुख्य सदस्य और 50,000 रुपये का इनामी। यह देवनाथ फार्मेसी का संचालक था और गिरोह की वित्तीय गतिविधियों (Money Handling) को संभालता था।

आकाश पाठक – मेड रेमेडी लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी दवा फर्म का संचालक।

अंकित श्रीवास्तव – आकाश पाठक का सहयोगी और तस्करी गिरोह का सक्रिय सदस्य।

दुबई कनेक्शन और करोड़ों का हेरफेर
डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने प्रेस वार्ता में बताया कि विकास सिंह इस पूरे सिंडिकेट का अहम हिस्सा था। उसने ‘शैली ट्रेडर्स’ से करीब 5,13,000 शीशियां कोडीनयुक्त कफ सीरप खरीदी थीं और लगभग 15 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। जांच में सामने आया है कि विकास कई बार दुबई की यात्रा कर चुका है, जिसके पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय लिंक खंगाल रही है।

कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस के अनुसार, विकास सिंह ही वह कड़ी था जिसने इस खेल के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल को अमित टाटा और आलोक सिंह जैसे बड़े तस्करों से मिलवाया था। आकाश पाठक की कंपनी को लाइसेंस दिलाने के लिए शुभम जायसवाल ने अपने हस्ताक्षर से फर्जी कंपीटेंट सर्टिफिकेट जारी किया था।

विकास के खिलाफ आजमगढ़, जौनपुर और वाराणसी के विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश एसटीएफ (UP STF) को भी लंबे समय से इसकी तलाश थी।

लुकआउट नोटिस ने रोका रास्ता
आरोपियों को भनक लग गई थी कि पुलिस उनके करीब है, इसीलिए उन्होंने नेपाल को सुरक्षित ठिकाना चुना। लेकिन पुलिस कमिश्नरेट की मुस्तैदी और लुकआउट नोटिस के कारण सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया था, जिससे उन्हें बॉर्डर पर दबोच लिया गया।

अवैध संपत्तियों पर नजर
वाराणसी पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। पुलिस का मुख्य फोकस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करना और तस्करी की कमाई से खड़ी की गई करोड़ों की अवैध संपत्तियों का पता लगाकर उन्हें कुर्क करना है।

अधिकारी का बयान
यह गिरफ्तारी इस बड़े नेटवर्क की कमर तोड़ने जैसी है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस अवैध कारोबार में शामिल हर छोटी-बड़ी कड़ी को सलाखों के पीछे भेजा जाए। – सरवणन टी, डीसीपी क्राइम

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