लखनऊ में नगर निगम का ऐसा खौफ, बेडरूम और ड्राइंग रूम में छिपा दीं 19 गाय और भैंसें, नजारा देख अधिकारी भी सन्न

लखनऊ में नगर निगम का ऐसा खौफ, बेडरूम और ड्राइंग रूम में छिपा दीं 19 गाय और भैंसें, नजारा देख अधिकारी भी सन्न

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध डेयरी संचालकों के खिलाफ नगर निगम के अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी कल्पना किसी अधिकारी ने नहीं की थी. बिजनौर रोड स्थित रॉयल सिटी कॉलोनी में जब टीम छापा मारने पहुंची, तो एक पशुपालक ने अपनी गाय और भैंसों को नगर निगम से बचाने के लिए घर के बेडरूम और ड्राइंग रूम में बंद कर दिया.

पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में नगर निगम, पशु कल्याण विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची, तो वहां अफरा-तफरी मच गई. जब टीम एक संदिग्ध मकान के पास पहुंची, तो वहां ताला लगा था. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जब घर का ताला खुलवाया गया, तो अंदर का दृश्य देख अधिकारी हैरान रह गए.

आलीशान घर के बेडरूम और ड्राइंग रूम में गाय-भैंसें बंधी हुई थीं. घर के अंदर चारों तरफ गोबर फैला हुआ था और भयंकर बदबू आ रही थी. पशु कल्याण अधिकारी ने बताया कि यह उनके करियर का पहला मामला है, जहां किसी ने पशुओं को छिपाने के लिए बेडरूम का इस्तेमाल किया हो.

19 पशु जब्त, ऐशबाग कांजी हाउस भेजे गए

नगर निगम की इस विशेष कार्रवाई में कुल 19 पशुओं को जब्त किया गया है. इनमें 11 भैंसें, 4 पड़िया, 3 गाय और 1 बछिया शामिल है. इन सभी पशुओं को ऐशबाग स्थित कांजी हाउस भेज दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित जुर्माना भरने के बाद ही इन पशुओं को छोड़ा जाएगा.

स्थानीय लोगों की शिकायत पर हुई कार्रवाई

रॉयल सिटी कॉलोनी के निवासी लंबे समय से अवैध डेयरी की शिकायत कर रहे थे. डेयरी संचालक न केवल अवैध रूप से पशुपालन कर रहे थे, बल्कि गोबर को खुले प्लॉटों और नालियों में बहा रहे थे. इससे जलभराव, गंदगी और मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया था.

भारी विरोध के बीच हटाए गए पशु

नगर निगम की इस कार्रवाई का पशुपालकों ने जमकर विरोध किया. कुछ लोगों ने पशु गाड़ी के सामने बैठकर रास्ता जाम करने की कोशिश भी की, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें हटा दिया गया. नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत शहरी सीमा में भैंस पालन पूरी तरह प्रतिबंधित है, जबकि गायों के लिए भी केवल दो पशुओं का ही लाइसेंस मान्य है.

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