अमेरिका से चीन तक, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का बजट कैसा, कहां करते हैं खर्च?

अमेरिका से चीन तक, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का बजट कैसा, कहां करते हैं खर्च?

भारत सरकार 1 फरवरी 2026 को संसद में अपना बजट पेश करने वाली है. आमतौर पर भारत के केन्द्रीय बजट में किसान, नौकरीपेशा, इनकम टैक्स स्लैब और आर्थिक विकास का रोडमैप पेश करने की परंपरा है. इस साल वित्त मंत्री के बजट के पिटारे में क्या है, यह खुलासा एक फरवरी को होगा. फिर देश के अर्थशास्त्री अपने-अपने तरीके से बजट का विश्लेषण करेंगे.

आइए, अपने बजट के बहाने समझने की कोशिश करते हैं कि दुनिया के प्रमुख देशों के बजट का फोकस किस क्षेत्र पर होता है. यह भी जानेंगे कि दुनिया के शीर्ष बजट वाले पांच देश कौन-कौन हैं?

संयुक्त राज्य अमेरिका: रक्षा, सुरक्षा और कर्ज का जाल

साल 2025 का कुल फेडरल बजट (खर्च) लगभग $7.3 ट्रिलियन डॉलर था. अमेरिका का बजट दुनिया में सबसे बड़ा है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य खर्च (Social Security और Medicare) में जाता है. 2025 में अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ता हुआ ब्याज भुगतान रहा है, जो अब उनके रक्षा बजट के बराबर पहुंच रहा है. अमेरिका अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च करता है. मतलब, उसका मुख्य फोकस सैन्य शक्ति को मजबूत करना है.इस तरह तीन चीजें उसकी प्राथमिकता में हुईं. सोशल सिक्योरिटी, मेडिकेयर और रक्षा.

Us Flag

अमेरिका की रक्षा बजट की प्राथमिकताओं में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते खतरे का मुकाबला करना, परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण, साइबर युद्ध क्षमता में वृद्धि और लंबी दूरी की मिसाइलों का विकास करना शामिल है. अमेरिका ने गोल्डन डोम नामक एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर 25 बिलियन डॉलर आवंटित किए हैं, जो मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए है. अमेरिका का दृष्टिकोण है कि सैन्य शक्ति के माध्यम से विश्व शांति बनाई जा सकती है.

भारत के लिए सबक: जब कर्ज़ बढ़ता है, तो विकास कार्यों के लिए पैसा कम बचता है. भारत को अपने ‘डेट-टू-जीडीपी’ अनुपात पर नज़र रखनी होगी.

चीन: बुनियादी ढांचा, आत्मनिर्भरता और तकनीकी युद्ध की तैयारी

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बजट चीन का है. साल 2025 में इसका कुल केंद्रीय खर्च लगभग 28.5 ट्रिलियन युआन यानी चार ट्रिलियन डॉलर था. चीन का बजट आत्मनिर्भरता और तकनीकी युद्ध की तैयारी पर आधारित है. साल 2025 में उनका पूरा ज़ोर New Quality Productive Forces (AI, चिप्स, ग्रीन एनर्जी) पर रहा है. चीन अपने बजट का बड़ा हिस्सा सीधे उद्योगों को सब्सिडी और रिसर्च के लिए दे रहा है. ताकि अमेरिका से आगे निकल सके. चीन के बजट की प्राथमिकताओं में बुनियादी ढांचे का विकास, परिवहन नेटवर्क का विस्तार, जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा, और तकनीकी नवाचार भी शामिल है.

China Trade Surplus

साल 2025 में चीन ने ट्रेड सरप्लस के लिहाज से रिकॉर्ड बनाया है.

चीन विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है. चीन का दृष्टिकोण है कि घरेलू खपत को बढ़ाकर आर्थिक विकास को गति दी जा सकती है. इसलिए चीन स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और बुजुर्गों की देखभाल जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा रहा है. चीन का लक्ष्य 2026-2030 की अवधि में 4.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना है.

भारत के लिए सबक: PLI जैसी योजनाओं को और सटीक और बड़े पैमाने पर ले जाने की ज़रूरत है ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन में जगह पक्की हो सके.

Japan Flag (1)

जापान के बजट का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा पर भी खर्च होता है.

जापान: दो मोर्चों पर लड़ रहा, रक्षा बजट बढ़ाया

जापान का बजट दो मोर्चों पर लड़ रहा है. एक तरफ तेज़ी से बूढ़ी होती आबादी (Social Security) और दूसरी तरफ क्षेत्रीय सुरक्षा (Defense). साल 2025 में जापान ने अपने रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है, जो उनके शांतिवादी इतिहास में एक बड़ा बदलाव है. पिछले साल जापान का कुल केन्द्रीय बजट 116 ट्रिलियन जापानी येन यानी 770 बिलियन डॉलर रहा है. जापान का रक्षा बजट पहली बार लगभग नौ ट्रिलियन येन को पार कर गया है. जापान ड्रोन तकनीक, लंबी दूरी की मिसाइलें, और तटीय रक्षा प्रणालियों में निवेश कर रहा है.

यह निवेश चीन के बढ़ते सैन्य खतरे के कारण किया जा रहा है. लेकिन जापान के बजट का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा पर भी खर्च होता है. जापान की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, इसलिए स्वास्थ्य सेवा और पेंशन पर खर्च बढ़ रहा है. सामाजिक सुरक्षा पर 39 ट्रिलियन येन आवंटित किए गए हैं. जापान के बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा कर्ज की अदायगी पर जाता है, जो देश की वित्तीय चुनौतियों को दर्शाता है.

भारत के लिए सबक: रक्षा और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कठिन है. भारत को अपनी युवा आबादी का फायदा उठाकर अभी से पेंशन और हेल्थ के टिकाऊ मॉडल बनाने होंगे.

Germany Flag

जर्मनी के के बजट में रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है.

जर्मनी: रक्षा और यूरोपीय सुरक्षा पर ध्यान

साल 2025 में जर्मनी का कुल फेडरल खर्च लगभग 489 बिलियन यूरो यानी लगभग 530 बिलियन डॉलर रहा. जर्मनी का बजट ‘फिस्कल डिसिप्लिन’ की मिसाल है. वे बहुत ज़्यादा कर्ज़ लेने के खिलाफ हैं. साल 2025 में उनका मुख्य फोकस ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और यूक्रेन युद्ध के कारण अपनी सेना को फिर से आधुनिक बनाने पर रहा है. जर्मनी यूरोप का सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है.

जर्मनी के के बजट में रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है. जर्मनी ने यूक्रेन को सहायता प्रदान करने और नाटो की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए रक्षा बजट बढ़ाया है. जर्मनी के बजट की प्राथमिकताओं में यूक्रेन को सैन्य सहायता, नाटो सदस्य देशों की सुरक्षा, और यूरोपीय सुरक्षा को मजबूत करना आदि शामिल है. इस बीच जर्मनी ने विकासशील देशों को दी जाने वाली सहायता में कटौती भी की है. यह निर्णय दर्शाता है कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं और वैश्विक विकास सहायता में कटौती कर रहे हैं.

भारत के लिए सबक: राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम रखना निवेश आकर्षित करने के लिए ज़रूरी है.

Britain Flag

यूनाइटेड किंगडम हेल्थ और डिफेंस सेक्टर पर अधिक पैसा खर्च करता है.

यूनाइटेड किंगडम: स्वास्थ्य सेवा और रक्षा में संतुलन

यूनाइटेड किंगडम का साल 2025 में कुल सरकारी खर्च लगभग 1.2 ट्रिलियन यूरो यानी 1.5 ट्रिलियन डॉलर था. यूके का बजट पब्लिक सर्विस को बचाने की जद्दोजहद है. वहां की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) बजट का बहुत बड़ा हिस्सा सोख रही है. और अनुमान है कि लगातार अगले कुछ सालों तक इसमें इजाफा होगा. अब उनका लक्ष्य टैक्स बढ़ाकर सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करना और निवेश के ज़रिए विकास को गति देना है.

यूके के बजट की प्राथमिकताओं में एनएचएस में 29 बिलियन पाउंड का अतिरिक्त निवेश, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में 10 बिलियन पाउंड का निवेश, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और दंत चिकित्सा सेवाओं में सुधार करना शामिल है. यूके ने रक्षा खर्च में भी वृद्धि की है, लेकिन स्वास्थ्य सेवा को अधिक प्राथमिकता दी है. यूके के बजट में भी विकास सहायता में कटौती की गई है, जो दर्शाता है कि विकसित देश अपनी आंतरिक जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

भारत के लिए सबक: केवल पैसा खर्च करना काफी नहीं है, सेवाओं की डिलीवरी और एफिशिएंसी (जैसे भारत में DBT और डिजिटल इंफ्रा) बजट की सफलता तय करती है.

भारत के 1 फ़रवरी बजट के लिए संकेत

दुनिया के शीर्ष 5 देशों के बजट से स्पष्ट है कि विभिन्न देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं. अमेरिका और जापान रक्षा पर जोर दे रहे हैं, चीन बुनियादी ढांचे और तकनीकी नवाचार पर, जर्मनी यूरोपीय सुरक्षा पर, और यूके स्वास्थ्य सेवा पर. भारत के लिए सीख यह है कि बजट केवल किसानों और कर मुद्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए. भारत को भी अपनी रक्षा क्षमता, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, और शिक्षा में संतुलित निवेश करना चाहिए. भारत को इन सभी क्षेत्रों में विकास के लिए एक रोडमैप प्रदान करना चाहिए.

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