महमूद गजनवी, भारतीय लुटेरा या विदेशी, क्या कहते हैं इतिहासकार? पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर BJP ने घेरा

महमूद गजनवी, भारतीय लुटेरा या विदेशी, क्या कहते हैं इतिहासकार? पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर BJP ने घेरा

हाल ही में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी. असल में उन्होंने प्राचीन और मध्यकाल में भारत आए कई आक्रान्ताओं को भारतीय लुटेरे कहकर संबोधित किया. उन्होंने महमूद गजनवी का तो नाम भी लिया और उसे विदेशी आक्रांता नहीं, भारतीय लुटेरा बताया. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में विवाद पैदा हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने तो उनके इस बयान के लिए कांग्रेस और हामिद अंसारी पर तीखा हमला बोला है. भाजपा का कहना है कि उनका यह बयान देश के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है.

अंसारी के इस बयान के बहाने जानना जरूरी है कि इस सिलसिले में इतिहास में क्या दर्ज है और इतिहासकार क्या मानते हैं? क्या गजनवी को भारतीय मानना उचित है या इतिहास उसे केवल विदेशी आक्रांता और लुटेरे के रूप में ही देखता है?

महमूद गजनवी कौन था?

सबसे पहले जान लेते हैं कि महमूद गजनवी कौन था? असल में वह आधुनिक अफगानिस्तान के ग़ज़नी का सुल्तान था. वह ग़ज़नवी वंश का विस्तार करने वाला पहला शासक था जिसने मध्य एशिया से लेकर ईरान तक अपना प्रभाव बढ़ाया. भारत पर 17 बार हमले किए. मुख्यतः आर्थिक लूट और सामरिक विस्तार उसका मुख्य लक्ष्य था. प्रमुख इतिहासकार सर हेनरी इलियट और जॉन डावसन ने अपनी कृतियों में लिखा है कि गजनवी के अभियानों का मुख्य उद्देश्य संपत्ति, दास और राजनीतिक प्रतिष्ठा था.

Former Vice President Hamid Ansari

महमूद गजनवी पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान को भाजपा ने देश के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला बताया है.

महमूद गजनवी को भारतीय मानने के आधार क्या हैं?

भारतीय होने के लिए तीन मूल-भूत मानक माने जाते हैं. व्यक्ति का जन्म भारत में हुआ हो. उसका स्थायी निवास हो या भारत पर राज किया हो. सांस्कृतिक एवं राजनीतिक तौर पर भारतीय भू-भाग उसकी पहचान का आधार हो. गजनवी इन तीनों कसौटियों पर खरा नहीं उतरता था. उसका जन्म, शासन और राजधानी, सब ग़ज़नी (अफगानिस्तान) में थे. उसने भारत में कोई स्थायी प्रशासन स्थापित नहीं किया. उसके आक्रमण लगातार लूट, धन-संग्रह और प्रतिष्ठा अर्जित करने के उद्देश्य से होते थे. इतिहासकार रोमिला थापर, इरफान हबीब और के.एस. लाल जैसे इतिहासकार भी इसे स्पष्ट करते हैं कि गजनवी का भारत के साथ कोई सांस्कृतिक या राजनीतिक एकीकरण नहीं था.

इतिहासकार क्या मानते हैं?

ज्यादातर इतिहासकार गजनवी को विदेशी आक्रांता मानते हैं. इसका कारण जन्म, शासन, सांस्कृतिक पहचान सब, भारतीय भूभाग से बाहर का था. हालांकि, वह भारतीय नहीं था, लेकिन उसके आक्रमणों ने उत्तर भारत की राजनीति बदली. हिंदू शाही राजवंशों को कमजोर किया. दिल्ली सल्तनत के उदय का मार्ग खोला इसलिए वह भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण पात्र है, पर भारतीय नहीं. प्रो. रिचर्ड ईटन जैसे कुछ आधुनिक विद्वान कहते हैं कि मध्यकालीन आक्रमणों को आज के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि उस समय राष्ट्र जैसा विचार ही मौजूद नहीं था. परंतु ईटन भी गजनवी को भारतीय नहीं, बल्कि मध्य एशियाई तुर्क शासक ही मानते हैं.

Ghazni Indian Lootera

महमूद गजनवी को ज्यादातर इतिहासकार विदेशी आक्रांता मानते हैं.

आर्थिक लुटेरा: इरफान हबीब का दृष्टिकोण

मशहूर इतिहासकार इरफान हबीब अपनी रचनाओं में बताते हैं कि गजनवी ने सोमनाथ, मथुरा और विभिन्न समृद्ध नगरों पर हमले मुख्यतः आर्थिक लाभ के लिए किए. उनका कहना है कि गजनवी के आक्रमण धार्मिक विस्तार की बजाय आर्थिक तकनीक का हिस्सा थे.

आक्रांता: के.एस. लाल और आर.सी. मजूमदार

भारतीय इतिहासकार आर.सी. मजूमदार अपनी पुस्तक The History and Culture of the Indian People में लिखते हैं कि गजनवी की नीतियां भारत के शहरी केंद्रों को कमजोर करने के लिए थीं, ताकि वह अपने साम्राज्य को वित्तीय रूप से मजबूत कर सके. इसी प्रकार के.एस. लाल बताते हैं कि गजनवी के अभियान एक सुनियोजित लूट की रणनीति थे, जिनके परिणामस्वरूप पश्चिमोत्तर भारत के कई क्षेत्र दशकों तक अस्थिर रहे.

साम्राज्य विस्तारक: अल-उत्बी का विवरण

गजनवी के दरबारी इतिहासकार अल-उत्बी (किताब: Tarikh-e-Yamini) लिखते हैं कि गजनवी का उद्देश्य इस्लामी गौरव बढ़ाना और अपने साम्राज्य को मजबूत करना था. उत्बी के अनुसार भारत की संपत्ति ग़ज़नी की शक्ति का स्रोत बनी. यह स्पष्ट करता है कि भारत उसके लिए स्थायी राजनीतिक भूभाग नहीं, बल्कि संसाधनों का क्षेत्र था.

इस वीडियो को लेकर मचा बवाल

हामिद अंसारी का बयान किस संदर्भ में?

हामिद अंसारी का मूल तर्क संभवतः यह था कि इतिहास में भारतीय शब्द आधुनिक राष्ट्रवाद के अर्थ में नहीं लिया जाता. प्राचीन व मध्यकाल में सीमाएं बदलती थीं. साम्राज्य फैलते-सिकुड़ते थे. सांस्कृतिक आदानप्रदान व्यापक था. ऐसे में कई लोग समय के साथ भारतीय कथा का हिस्सा बने. उनका तर्क सांस्कृतिक समावेशन पर आधारित था, न कि राजनीतिक पहचान पर.

लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि गजनवी का भारत आने का मकसद सिर्फ लूट था. उसने कभी भारतीय समाज का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं की इसलिए उसे भारतीय कहना इतिहास के विपरीत है.

गजनवी भारतीय नहीं, लेकिन भारतीय इतिहास का हिस्सा

इतिहासकारों की राय का सार यह है महमूद गजनवी भारतीय नहीं था. वह एक विदेशी शासक और आक्रांता था, जिसका उद्देश्य लूट और सामरिक विस्तार था. भारतीय इतिहास पर उसका प्रभाव गहरा और दीर्घकालिक रहा. आधुनिक राजनीतिक बयानबाज़ी के बजाय इतिहास को उसके समय के संदर्भ में समझना आवश्यक है. पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का बयान एक व्यापक सांस्कृतिक तर्क पर आधारित था, लेकिन इतिहासकारों की दृष्टि में गजनवी को भारतीय कहना तथ्यों से मेल नहीं खाता.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *