IIT कानपुर में स्टूडेंट्स क्यों कर रहे सुसाइड? होगी जांच… मानवाधिकार आयोग ने दिए निर्देश

IIT कानपुर में स्टूडेंट्स क्यों कर रहे सुसाइड? होगी जांच… मानवाधिकार आयोग ने दिए निर्देश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में छात्रों की लगातार आत्महत्याओं का मामला अब राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है. इस संबंध में एक याचिका दाखिल की गई है, जिस पर आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पुलिस कमिश्नर कानपुर और आईआईटी निदेशक से जांच रिपोर्ट तलब की है. बीत दो वर्षों में संस्थान के 9 स्टूडेंट्स अपनी जान गवां चुके है.

याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवीण फाइटर ने आयोग को बताया कि पिछले 25 महीनों में आईआईटी कानपुर में 9 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है. विशेष रूप से जनवरी माह में ही दो शोधार्थी छात्रों ने आत्महत्या कर अपना जीवन समाप्त कर लिया. सबसे हालिया घटना 20 जनवरी की है, जब राजस्थान के चूरू जिले के निवासी शोधार्थी छात्र रामस्वरूप ईसराम ने हॉस्टल की दूसरी मंजिल से कूदकर दोपहर लगभग 1:30 बजे आत्महत्या कर ली. इस घटना ने पूरे कैंपस में हड़कंप मचा दिया और छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं को तेज कर दिया.

दो वर्षों में कितने स्टूडेंट्स की आत्महत्या?

अधिवक्ता ने याचिका में पूर्व की घटनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया है. 19 दिसंबर 2023 को डॉ. पल्लवी ने, 10 जनवरी 2024 को एमटेक छात्र विकास मीणा ने, 18 जनवरी 2024 को शोधार्थी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने, 10 अक्टूबर 2024 को शोधार्थी छात्रा प्रगति हरया ने, 10 फरवरी 2025 को शोधार्थी स्कॉलर अकिंत यादव ने, 25 अगस्त 2025 को सॉफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी ने, 1 अक्टूबर 2025 को बीटेक छात्र धीरज सैनी ने और 29 दिसंबर 2025 को बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जय सिंह मीणा ने आत्महत्या की. आरोप है कि इन घटनाओं की श्रृंखला से स्पष्ट है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में छात्रों पर पढ़ाई, शोध और प्रतिस्पर्धा का दबाव असहनीय स्तर तक पहुंच रहा है.

याचिकाकर्ता ने की ये मांग

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रवीण फाइ्टर ने आयोग के समक्ष तर्क रखते हुए कहा कि कि यह अत्यंत चिंता का विषय है कि ऐसा कौन सा कारण है, जिससे लगातार छात्र-छात्राएं सुसाइड कर रहे हैं. यह न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि देश की बौद्धिक संपदा का अपूरणीय नुकसान भी है. संस्थान में तनाव प्रबंधन, काउंसलिंग और समर्थन प्रणाली की कमी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है. उन्होंने आयोग से मांग की कि इन घटनाओं की जड़ तक पहुंचा जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

आयोग ने कहा, जांच कर सौंपे रिपोर्ट

आयोग ने इस मामले में पुलिस आयुक्त कानपुर और आईआईटी निदेशक को निर्देश दिए कि वह आवश्यक जांच करें और 16 फरवरी 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें. आयोग ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में आत्महत्याओं के कारणों, संस्थान की नीतियों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों का विस्तृत विश्लेषण शामिल होना चाहिए.

अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें रिपोर्ट पर चर्चा होगी. लगातार हो रही सुसाइड की घटनाएं आईआईटी कानपुर के लिए एक चुनौती है, जहां विश्व स्तरीय शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा और कल्याण पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन, नियमित काउंसलिंग सेशन और दबाव कम करने वाले कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.

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