Budget Decode: भारत के लिए बायोलॉजिक मेडिसिन कैसे बनेगी गेम चेंजर? बजट में ऐलान के बाद समझें पूरा गणित

Budget Decode: भारत के लिए बायोलॉजिक मेडिसिन कैसे बनेगी गेम चेंजर? बजट में ऐलान के बाद समझें पूरा गणित

बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बायोलॉजिक मेडिसिन के लिए बड़ा ऐलान किया है. ये वो दवाएं जो कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर में इस्तेमाल की जाती हैं. इसे ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने हेल्थ सेक्टर के बायोफार्मा के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का बजट जारी किया. इसके लिए बायोफार्मा शक्ति नाम इस्तेमाल किया गया है. यहां SHAKTI का मतलब Strategy for Healthcare Advancement through Knowledge, Technology and Innovation है.

बजट में वित्त मंत्री ने कहा है, भारत में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज बढ़ रही हैं. इसमें डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर शामिल हैं. बायोलॉजिक मेडिसिन इन बीमारियां को कंट्रोल करने का काम करती है. बायोलॉजिक मेडिसिन कम कीमत में लम्बी उम्र और जीवन को बेहतर बनाने के लिए कारगर साबित होती है. अब बजट में बायोफार्मा का दायरा बढ़ाकर ऐसी दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का प्लान है. जानिए क्या होती है बायोलॉजिक मेडिसिन, कहां-कहां इस्तेमाल होती है और इन्हें बनाना मुश्किल क्यों है.

क्या है बायोलॉजिक मेडिसिन?

बायोलॉजिक मेडिसिन दूसरी दवाओं से थोड़ा अलग है. ये ऐसी दवाएं हैं जो बैक्टीरिया, यीस्ट, जानवरों या मानव कोशिकाओं से बनाई जाती है. इनमें प्रोटीन, एंटीबॉडी, हॉर्मोन या वैक्सीन जैसे जटिल मॉलिक्यूल होते हैं. इन्हें बायोटेक्नोलॉजी के जरिए लैब में विकसित किया जाता है. आमतौर पर यह दवा इंजेक्शन के रूप में होती है.

बायोलॉजिक मेडिसिन में ब्लड, प्लाज्मा, टिश्यू, बोन ग्राफ्ट, वैक्सीन, इम्यूनोथैरेपी, इंसुलिन थैरेपी, स्टेम सेल थैरेपी, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी और बायाेलॉजिक DMARDs शामिल हैं.

Biologic Medicine Uses In Diseases

कैसे और कहां काम आती हैं ये दवाएं?

  • वैक्सीन: यह संक्रामक बीमारियों को रोकती हैं. वैश्विक स्तर पर वैक्सीन के जरिए कई बीमारियों को पूरी तरह से खत्म किया गया है. जैसे- पोलियो. कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से लड़ने में वैक्सीन ने अहम भूमिका निभाई.
  • ब्लड और प्लाज्मा: इनका इस्तेमाल उन स्थितियों में किया जाता है जब शरीर में ब्लड की कमी हो जाती है. या फिर ऐसी खास तरह की बीमारी जिसमें ब्लड और प्लाज्मा को चढ़ाना जरूरी हो जाता है. जैसे- ब्लड डिसऑर्डर, ब्लड कैंसर और न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर.
  • जीन थैरेपी-इम्यूनोथैरेपी: कैंसर के इलाज में बायोलॉजिक काफी असरदार साबित हुई है. यह कैंसर जैसी बीमारियों पर कई तरह से असर करती है. इसमें जीन थैरेपी, स्टेम सेल थैरेपी और इम्यूनोथैरेपी शामिल हैं.
  • ऑटो-इम्यून डिजीज करती हैं कंट्रोल: बायोलॉजिक क्रॉनिक इंफ्लेमेट्री और ऑटो-इम्यून डिजीज को कंट्रोल करती है. ये दर्द को भी कंट्रोल करती हैं.

Biologic Medicine Announcement In Budget 2026

इसे बनाना कितना मुश्किल?

दूसरी दवाओं के मुकाबले बायोलॉजिक मेडिसिन को बनाना मुश्किल होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसे इंसान और जीवों से तैयार किया जाता है. इसके मॉलीक्यूल कॉम्प्लेक्स होते हैं. इसे सामान्य दवाओं की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इससे जुड़े छोटे-छोटे बदलाव बहुत सेंसेटिव होते हैं. यही वजह है कि दूसरी दवाओं के मुकाबले इसे बाजार तक पहुंचने में अधिक समय लगता है. इसलिए ये महंगी भी होती हैं.

अधिकांश बायोलॉजिक्स इंजेक्शन के रूप में दिए जाते हैं. कुछ आईवी इन्फ्यूजन के रूप में दिए जाते हैं. ज्यादातर लोगों को कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है, लेकिन इंजेक्शन से दर्द, सूजन या त्वचा पर चकत्ते जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं. कुछ लोगों में बुखार या मितली महसूस हो सकती है. ज्यादातर प्रतिक्रियाएं हल्की होती हैं, और हो सकता है कि आपको कोई प्रतिक्रिया न हो.

Medical Tourism In India

भारत में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए कई ऐलान किए गए हैं.

कैसे बनेगी गेमचेंजर?

भारत बायोफार्मा शक्ति को बूस्ट करके बायोलॉजिक मेडिसिन का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है. अगर देश में बायोलॉजिक प्रोडक्शन बढ़ता है तो दवाएं सस्ती होंगी. आयात पर निर्भरता घटेगी. बायोटेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा और हाई-स्किल जॉब्स पैदा होंगी. सरकार ने पहले ही भारत में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कही है. यानी दूसरे देशों से भारत आकर इलाज कराने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी. इससे अर्थव्यस्था को रफ्तार मिलेगी.

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