नेपाल से UP आईं दुल्हनें नहीं डाल पाएंगी वोट, ऐसी क्या है अड़चन? UP के इन 9 जिलों में ऐसी खूब शादियां हुईं

नेपाल से UP आईं दुल्हनें नहीं डाल पाएंगी वोट, ऐसी क्या है अड़चन? UP के इन 9 जिलों में ऐसी खूब शादियां हुईं

उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे जिलों में ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता सदियों पुराना है. यहां के गांवों में नेपाल से दुल्हनें लाना और अपनी बेटियों की शादी नेपाल में करना आम बात है, लेकिन अब विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने इन नेपाल मूल की बहुओं के सामने बड़ी अड़चन खड़ी कर दी है. कई मामलों में वे मतदाता सूची से बाहर हो रही हैं, जिससे वे आगामी चुनावों में वोट नहीं डाल पाएंगी. भले ही वे वर्षों से भारत में रह रही हों, परिवार संभाल रही हों और भारतीय समाज का हिस्सा बन चुकी हों.

चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2025-26 में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर नाम सत्यापित किए जा रहे हैं. नेपाल से आईं महिलाओं के पास अक्सर 2003 की सूची में अपना या अभिभावकों का नाम/एपिक आईडी नहीं होता, क्योंकि वे उस समय नेपाल में थीं. इसके अलावा, भारत के बाहर जन्मे लोगों के लिए पहले फॉर्म-6 या 6A में जन्म स्थान दर्ज करने का विकल्प सीमित था. परिणामस्वरूप कई बहुओं को ‘नो मैपिंग’ नोटिस मिल रहे हैं और उनका नाम हटाया जा रहा है.

इन 9 जिलों में नेपाल से होती हैं शादियां

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या सबसे ज्यादा है. गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, गोंडा और पीलीभीत जैसे नौ जिलों में नेपाल से बड़ी संख्या में शादियां होती हैं. इन जिलों के सीमावर्ती गांवों में हजारों परिवार ऐसे हैं, जहां बहू नेपाल से आईं हैं. महराजगंज के नौतनवा, पीलीभीत के खरुआ जैसे इलाकों में दर्जनों-दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं, जो 5-10-15 साल से भारत में बसी हैं, लेकिन अब वोटिंग अधिकार पर संकट मंडरा रहा है.

9 साल पहले हुई शादी, अब SIR लिस्ट से नाम गायब

पीलीभीत जिले की पूजा (नेपाल के कंचनपुर मूल निवासी) ने 9 साल पहले महेंद्र सिंह से शादी की. पिछले पंचायत और लोकसभा चुनाव में उन्होंने वोट भी डाला, लेकिन SIR में 2003 की एपिक आईडी मांगने पर उनका नाम सूची से बाहर हो गया. ऐसी ही स्थिति महराजगंज, बहराइच और अन्य जिलों में है. महिलाएं राशन कार्ड, आधार, बैंक खाता रखती हैं, लेकिन नागरिकता प्रमाण या पुरानी सूची के अभाव में मतदाता नहीं बन पा रही हैं.

क्या है कानूनी अड़चन?

भारत-नेपाल संधि 1950 के तहत दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के यहां रहने-काम करने की छूट है, लेकिन मतदान का अधिकार भारतीय नागरिकता से जुड़ा है. नेपाल से आई महिलाओं को भारतीय नागरिक बनने के लिए वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता Citizenship by Registration under Section 5(1)(c) of Citizenship Act लेनी पड़ती है, जो प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है. SIR में सख्ती से नागरिकता प्रमाण मांगने से कई पात्र महिलाएं वंचित हो रही हैं.

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