PF में निवेश करने वालों को लगेगा झटका, EPFO कम करने वाला है ब्याज!

PF में निवेश करने वालों को लगेगा झटका, EPFO कम करने वाला है ब्याज!

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से उम्मीद की जा रही है कि वह मार्च के पहले हफ्ते में होने वाली अपनी 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में 2025-26 के लिए पीएफ डिपॉजिट पर इंटरेस्ट रेट को थोड़ा कम करके 8 से 8.20 फीसदी के बीच तय कर सकता है. फिलहाल 2024-25 के लिए यह ब्याज दर 8.25 फीसदी है. इसका मकसद यह है कि ईपीएफओ के फंड पर ज्यादा दबाव न पड़े.

हालांकि, इस मामले से जुड़े सोर्स का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों की वजह से पॉलिटिकल प्रेशर बना हुआ है. ऐसे में ईपीएफओ लगातार तीसरे साल भी इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव न करते हुए स्टेटस को बनाए रख सकता है.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी ऑप्शन पर चर्चा हो रही है, लेकिन विकसित भारत एम्प्लॉयमेंट स्कीम के तहत ईपीएफओ में नए सब्सक्राइबर तेजी से जुड़ रहे हैं. ऐसे में ज्यादा लोगों को फ्यूचर पेमेंट करने के लिए इंटरेस्ट रेट थोड़ा कम किया जा सकता है, ताकि ईपीएफओ के पास मिनिमम फाइनेंशियल बफर बना रहे. सीबीटी की बैठक में फैसला लेने के बाद इंटरेस्ट रेट को सबसे पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री से अप्रूवल मिलेगा. इसके बाद लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट मिनिस्ट्री की ओर से इसे ऑफिशियल नोटिफिकेशन के जरिए जारी किया जाएगा. उम्मीद है कि यह ब्याज इस साल के बीच तक सब्सक्राइबर के खातों में क्रेडिट कर दिया जाएगा.

वेज लिमिट पर भी होगा फैसला

ईपीएफओ की फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी फरवरी के आखिरी हफ्ते में बैठक करेगी. इस बैठक में मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में अब तक किए गए इन्वेस्टमेंट से मिले रिटर्न के आधार पर इंटरेस्ट रेट तय किया जाएगा और फिर इसे रिकमेंडेशन के तौर पर सीबीटी के सामने रखा जाएगा. इसके अलावा बोर्ड से यह भी उम्मीद है कि वह ईपीएफओ के तहत सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ाने के लिए सैलरी लिमिट को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने पर भी विचार करेगा. हालांकि, सीबीटी मीटिंग का एजेंडा अभी फाइनल नहीं हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि वह चार महीने के अंदर सैलरी लिमिट बढ़ाने पर फैसला करे. कोर्ट ने कहा था कि बढ़ती सैलरी और महंगाई की वजह से बड़ी संख्या में वर्कर अनिवार्य पीएफ कवरेज के दायरे से बाहर हो गए हैं. गौरतलब है कि 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट साल 2014 से अनचेंज्ड है. इस दौरान लो और मिड-स्किल्ड एम्प्लॉयीज की इनकम बढ़ी है, जिसकी वजह से वे ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज से बाहर हो गए. एफआईएसी, सीबीटी की एक अहम सब-कमेटी है, जो इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और ऑडिट ओवरसाइट की जिम्मेदारी संभालती है.

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