
यूपी में ‘घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज पर विवाद बढ़ गया है। ब्राह्मण समाज ने इस वेब सीरीज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ब्राह्मण समाज को इस फिल्म के टाइटल पर एतराज है। वहीं, राजनीतिक दल भी इसका विरोध कर रहे हैं। प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध को देखते हुए ‘घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज पर एफआईआर दर्ज की गई है। ये कार्रवाई सीएम योगी के आदेश पर हुई है। सरकार का कहना है कि सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ये कार्रवाई की गई है।
हजरतगंज कोतवाली के एसएचओ विक्रम सिंह ने बृहस्पतिवार को खुद यह प्राथमिकी दर्ज कराई। विक्रम सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पुलिस ने फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निदेशक और उनकी टीम के खिलाफ एक जाति विशेष को अपमानित करने और वैमनस्यता फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वैमनस्यता को बढ़ावा देना), 299 (जानबूझकर द्वेषपूर्ण तरीके से किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 353 (सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम की धारा 66 के तहत दर्ज की गई है।
एसएचओ ने शिकायत में कहा है कि ओटीटी मंच नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ उसके निदेशक एवं उनकी टीम द्वारा रिलीज की जा रही है। उन्होंने शिकायत की है कि इस फिल्म का नाम एक विशेष जाति को चिह्नित कर उसे अपमानित करता है जिससे उस जाति विशेष में काफी रोष व्याप्त है। प्राथमिकी के अनुसार, कई सामाजिक संगठन एवं संस्थाओं की फिल्म को लेकर उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी भी है। निदेशक द्वारा प्रसारित की गई इस फिल्म से समाज में सौहार्द एवं शांति बिगड़ने एवं समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलने की आशंका है।
जानकारी के मुताबिक, सीएम योगी के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में ये एफआईआर दर्ज की गई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित आपत्तिजनक कंटेंट पर हजरतगंज पुलिस ने ये कार्रवाई की है। यह वेब सीरीज नेटफ्लिक्स पर प्रसारित की जा रही है। वेब सीरीज में जातिगत भावनाएं आहत करने का आरोप है। इसके अलावा वैमनस्य फैलाने और सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से सामग्री प्रसारण का भी आरोप है।
वहीं, बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी ‘घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज पर कड़ी आपत्ति जताई है। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि ‘यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यूपी में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ‘पंडित’ को घुसपैठिया बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है। इससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष व्याप्त है। इसका हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये। बसपा की यही मांग भी है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस मामले पर कहा कि हर समाज हर धर्म का सम्मान होना चाहिए। किसी भी धर्म को समाज को नीचा दिखाने का काम बर्दाश्त नही किया जाएगा। पहले फिल्मों में ठाकुरों को बदनाम करने की कोशिश की गई। अब ब्राह्मणों को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। यूपी सरकार किसी भी धर्म जाति को बदनाम करने की साजिश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये सब सेंसर बोर्ड को देखना चाहिए। इसके पीछे कोई राजनीति नहीं है। बसपा हो या सपा आशा पाले हैं कि ब्राह्मणों को गुमराह करके अपने मे जोड़ देंगे लेकिन ब्राह्मण और सवर्ण हमेशा भाजपा का वोटर रहा है, ये सनातनी वोटर हैं और बीजेपी के हैं।
बता दें कि ‘घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज के खिलाफ यूपी के कई जिलों में ब्राह्मण समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने वेब सीरीज पर बैन लगाने की मांग की है। साथ ही इसके निदेशक और कलाकारों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
