सूरजपुर: प्रतापपुर विकासखंड के वासुदेवपुर दवनकरा स्थित शासकीय विद्यालय में बच्चों से झाड़ू लगवाने और साफ-सफाई कराए जाने का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर सूरजपुर एस. जयवर्धन ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं. फिलहाल आरोपों की औपचारिक जांच शुरू होना शेष है, लेकिन प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है.
खबर के बाद हरकत में प्रशासन
मामले से जुड़ा वीडियो सामने आने और खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे. बच्चों से सफाई कराए जाने जैसे संवेदनशील मामले को देखते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रतापपुर मुन्नूलाल धुर्वे, संबंधित संकुल समन्वयक (सीएससी) एवं विद्यालय में पदस्थ दो शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया.
डीईओ कार्यालय से जारी नोटिस में चारों अधिकारियों-कर्मचारियों को दो दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि बच्चों से साफ-सफाई कराए जाने का मामला यदि सत्य पाया जाता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता और नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.
जांच कमेटी करेगी तथ्यात्मक पड़ताल
जिला प्रशासन की ओर से बताया गया है कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए समिति गठित की जा रही है, जो विद्यालय पहुंचकर बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं संबंधित अधिकारियों के बयान लेगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. प्रशासन ने साफ किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.
बीईओ की भूमिका पर उठे सवाल
हालांकि, इस पूरे मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुन्नूलाल धुर्वे की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालयों का नियमित निरीक्षण और निगरानी सही ढंग से होती, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती. बताया जा रहा है कि बीईओ पूर्व में भी विवादों में रहे हैं और उनके कार्यकाल को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं.
मामले में यह भी चर्चा का विषय है कि विद्यालय में सफाईकर्मी की नियुक्ति अथवा वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई. यदि किसी कारण से सफाईकर्मी उपलब्ध नहीं थे, तो बच्चों से सफाई कराना नियमों के विरुद्ध है. यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर विद्यालय प्रबंधन, संकुल और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की बनती है.
आदिवासी बच्चों से जुड़ा संवेदनशील मामला
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चूंकि मामला आदिवासी बच्चों से जुड़ा है, इसलिए इसे अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है. जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने कहा है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर जांच रिपोर्ट कलेक्टर सूरजपुर के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई से इनकार नहीं किया जाएगा.
प्रदेश स्तर पर चर्चा
इस घटना ने केवल प्रतापपुर या सूरजपुर जिले तक सीमित न रहते हुए पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच समिति की रिपोर्ट क्या सामने लाती है और क्या यह मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगा या वास्तव में जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी.
