
इस साल 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के साथ ही व्रत करने का भी विधान है। धार्मिक मान्यताओं कए अनुसार, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन ही महादेव और मां गौरी का विवाह हुआ था। हर साल फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि के दिन धूमधाम के साथ महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भव्य तरीके से भगवान शिव की बारात भी निकाली जाती है। काशी समेत अन्य शहरों में महाशिवरात्रि का अनोखा रंग देखने को मिलता है। शिव मंदिरों में भी भक्तों की खासा भीड़ उमड़ती है।
आपको बता दें कि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी और माता पार्वती की आराधना और दर्शन के साथ ही व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। महाशिवरात्रि का व्रत दूसरे दिन ही खोला जाता है। यानी कि 15 को शिवरात्रि है तो इस व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा। लेकिन महाशिवरात्रि का व्रत इन लोगों को नहीं रखना चाहिए। शास्त्रों में भी कहा गया है कि हर व्रत सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता है। तो आइए जानते हैं किन लोगों को महाशिवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए। साथ ही ये भी जानेंगे कि बिना व्रत रखें कैसे भगवान शिव की उपासना करें कि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो।
गर्भवती महिलाओं को महाशिवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी में पूर्ण स्वस्थ आहार की जरूरत होती है। भूखे पेट रहने से शिशु पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं के हर समय कुछ न कुछ खाने की सलाह दी जाती है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी व्रत रखने से बचना चाहिए, क्योंकि उनके शरीर को भी पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। इन दोनों ही स्थिति में निर्जला और कठोर व्रत नहीं रखना चाहिए। फिर भी अगर व्रत रखना चाहती हैं तो अपने डॉक्टर की सलाह पर फलाहार या बिना नमक वाला भोजन कर के महाशिवरात्रि का व्रत रख सकती हैं। भगवान शिव एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं तो जरूरी नहीं है कि ऐसी स्थिति में भी कठिन व्रत रखा जाए।
मासिक धर्म में महिलाएं भगवान की मूर्ति और तस्वीर को स्पर्श नहीं कर सकती हैं। लेकिन इस स्थिति में महिलाएं महाशिवरात्रि का व्रत रख सकती है। भगवान शिव का मानसिक जाप, ध्यान और मंत्र का जाप कर सकती हैं। ऐसा करने से भी भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
अगर कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो उन्हें महाशिवरात्रि का व्रत नहीं रखना चाहिए। हार्ट पेशेंट, डायबिटीज और हाई या लो ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को भी शिवरात्रि का व्रत करने से बचना चाहिए। लंबे समय तक भूखा रहना इनकी सेहत के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही व्रत रखना चाहिए। व्रत की जगह महाशिवरात्रि के दिन दान-पुण्य, शिव पूजा और मंत्रों का जाप कर के भी महादेव की कृपा पा सकते हैं।
बुजुर्गों को भी महाशिवरात्रि का व्रत नहीं करना चाहिए। इन्हें अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। उपवास करने के जगह बुजुर्गों को केवल महादेव की पूजा करनी चाहिए। सच्चे मन से पूजा करने से भी भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही इस दिन गरीब और जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं।
