खाना जरूरत से थोड़ा ज्यादा ही बनाना… इस सोच के पीछे क्या छिपा है गूढ़ रहस्य? लाभ चाहिए तो जान लें

खाना जरूरत से थोड़ा ज्यादा ही बनाना… इस सोच के पीछे क्या छिपा है गूढ़ रहस्य? लाभ चाहिए तो जान लें

Astro Tips: हिंदू धर्म में भोजन केवल भोजन नहीं है बल्कि यह शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का एक स्रोत है. भोजन से जुड़े नियम हर घर में अलग अलग होते हैं और उनका पालन भी किया जाता है ताकि मां अन्नपूर्णा की कृपा पाई जा सके. शास्त्रों की मानें तो रसोई घर में समृद्धि बनी रहे इसके लिए अन्न का सम्मान करना आवश्यक है. हालांकि कई बार आपने सुना होगा कि खाना जरूरत से थोड़ा ज्यादा ही बनाना चाहिए. आपने कभी सोचा है कि ऐसा कहने के पीछे का गूढ़ रहस्य क्या है, आज की इस कड़ी में हम इसी बारे में जानेंगे.

अतिथि से जुड़ा है रहस्य
जरूरत से थोड़ा ज्यादा भोजन बनाने के पीछे का रहस्य है कि अगर घर में अचानक अतिथि आ जाएं तो उनके लिए भी भोजन परोसा जा सकें. घर से किसी भी अथिति को खाली पेट नहीं जाने देना चाहिए. दरअसल, सनातन धर्म में अतिथि को देवता माना जाता है. अतिथि को भोजन कराकर तृप्त करने से घर में सुख समृद्धि आती है और माता लक्ष्मी और माता अन्नपूर्णा की कृपा ऐसे घर में बनी रहती है. अन्न की कभी कमी नहीं होती है.

गाय, कुत्ते, पक्षियों और चींटियों से जुड़ा है रहस्य
घर में थोड़ा ज्यादा खाना बनाने के पीछे का रहस्य गाय, कुत्ते, पक्षियों और चींटियों से भी जुड़ा है. परिवार के सदस्यों के हिसाब से छोड़ा ज्यादा खाना बनाने से गाय, कुत्ते, पक्षियों और चींटियों को भी भोजन कराकर तृप्त किया जा सकता है. सनातन धर्म में पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते को निकालने की परंपरा होती है. इस उपाय को करने से घर में कभी भी भोजन की कमी नहीं होती है. दूसरे जीवों का पेट भरने से भाग्य खुता है और जीवन में सकारात्मकता आती है.

संपन्नता से जुड़ा है रहस्य
भोजन जरूरत से थोड़ा ज्यादा बनाने से मन में ‘संपन्नता’ का भाव आता है. नाप-तोलकर खाना बनाना और खाना परिवार के लिए ही कम पड़ जाना ये सब मानसिक दरीद्रता का भाव लाते हैं. थोड़ा अतिरिक्त भोजन बनाने से घर में खुशहाली और धन का भंडार बना रहता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई से भोजन पूरी तरह से खत्म हो जाना या बर्तन खाली रखना शुभ नहीं होता है. ऐसे में थोड़ा अधिक भोजन बनाना घर की संपन्नता के लिए बहुत जरूरी होता है.

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