
नई दिल्ली: जर्मनी के म्यूनिख में एक इवेंट में एक सिक्योरिटी ऑफिसर ने पाकिस्तान आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर को उनके आइडेंटिटी कार्ड को लेकर लगभग रोक दिया था. फील्ड मार्शल मुनीर और उनकी टीम म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए जर्मन शहर आए थे.
एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सिक्योरिटी ऑफिसर पाकिस्तानी आर्मी चीफ से अपना आइडेंटिटी कार्ड सामने दिखाने के लिए कह रहा है. कॉन्फ्रेंस में एंट्री से कुछ ही कदम दूर सिक्योरिटी ऑफिसर ने उनके नेम बैज पर टैप किया और उनके गले में लटक रहे ID कार्ड की ओर इशारा करते हुए कहा, 'क्या आप इसे घुमा सकते हैं?'
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UPDATE!!
Field Marshal Army Chief Asim Munir arrives for Munich Security Conference in Germany— HTN World (@htnworld)
JSMM ने क्यों किया विरोध?
जर्मनी के एक सिंधी पॉलिटिकल ऑर्गनाइजेशन, जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज़ यानी JSMM ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में फील्ड मार्शल मुनीर के शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई है, इस न्योते को बहुत अफसोसजनक बताया है और इंटरनेशनल स्टेकहोल्डर्स से इस पर ध्यान देने की अपील की है. JSMM के सदस्यों ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को हाईलाइट करते हुए कॉन्फ्रेंस स्थल के बाहर प्रोटेस्ट किया.
JSMM के चेयरमैन शफी बुरफत ने क्या कहा?
यूनाइटेड नेशंस, यूरोपियन यूनियन, जर्मन सरकार और इंटरनेशनल मानवाधिकार संस्थाओं को दिए एक फॉर्मल बयान में, JSMM के चेयरमैन शफी बुरफत ने फील्ड मार्शल मुनीर की हाई-लेवल ग्लोबल फोरम में मौजूदगी पर अफसोस जताया.
क्यों कराया जाता है म्यूनिक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस?
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस यानी MSC जर्मनी के म्यूनिख में हर साल होने वाला एक बड़ा इंटरनेशनल फोरम है. इसका मुख्य मकसद दुनिया भर के नेताओं, डिफेंस एक्सपर्ट्स, मिलिट्री अधिकारियों और एकेडेमिक्स को एक साथ लाना है ताकि ग्लोबल सिक्योरिटी पॉलिसी, उभरते खतरों, झगड़े सुलझाने और शांति बनाने के लिए डिप्लोमैटिक बातचीत पर चर्चा को बढ़ावा दिया जा सके.
दुनिया का ध्यान अभी जर्मनी के तीसरे सबसे बड़े शहर म्यूनिख पर है, क्योंकि म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस चल रही है. यह इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है. इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत 1962 में जर्मन मिलिट्री ऑफिसर इवाल्ड वॉन क्लेस्ट ने की थी. यह 1963 से हर साल होता आ रहा है. कोल्ड वॉर के दौरान, म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को वर्कुंडे कॉन्फ्रेंस के नाम से जाना जाता था.
