
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में रोड कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार ने बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे प्रदेश के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे और हाईवे आपस में जुड़ सकेंगे. यह परियोजना उत्तर से दक्षिण तक यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने के साथ-साथ पूर्वांचल, बुंदेलखंड और एनसीआर क्षेत्रों को बेहतर ढंग से जोड़ेगी.
इस कॉरिडोर के माध्यम से बरेली को आगरा, झांसी और ललितपुर से जोड़ा जाएगा. यह मार्ग लगभग 547 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें पहले से मौजूद फोर-लेन हिस्सों का उपयोग करते हुए कुछ हिस्सों में अपग्रेडेशन किया जाएगा. विशेष रूप से, बरेली में यह प्रस्तावित शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (जिसे पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है) से जुड़ेगा. गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे नवाबगंज और बहेड़ी क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जहां बरेली जिले के करीब 68 गांव प्रभावित होंगे.
विशाल उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का निर्माण
इसके अलावा, गंगा एक्सप्रेसवेको बरेली-मथुरा हाईवे से कनेक्ट किया जाएगा. इसी तरह यमुना एक्सप्रेसवे भी इस नेटवर्क से जुड़ेगा, जिससे एक विशाल उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का निर्माण होगा. इससे पूर्वांचल, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी स्थापित होगी.
कॉरिडोर के लिए लगभग 7000 करोड़ रुपये का प्रावधान
सरकार ने इस बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर के लिए लगभग 7000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह हिस्सा छह नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा है, जिन्हें लोक निर्माण विभाग ने अंतिम रूप दिया है. योजना के अनुसार, अगले 5 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे और हाईवे को आपस में जोड़ने का लक्ष्य है, जिसमें कुल 7 एक्सप्रेसवे इस नेटवर्क से जुड़ेंगे. यह विकास उत्तर प्रदेश के औद्योगिक, कृषि और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के लिए क्रांतिकारी साबित होगा.
यात्रा समय में कमी, व्यापार में वृद्धि, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रुहेलखंड, बुंदेलखंड और अन्य पिछड़े क्षेत्रों का तेजी से विकास होगा. प्रदेश सरकार अब इन परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की तैयारी में जुटी है, ताकि यूपी की सड़क नेटवर्क पूर्व-पश्चिम से आगे बढ़कर उत्तर-दक्षिण दिशा में भी मजबूत हो सके. यह कदम राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने वाला माना जा रहा है.
