अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026: बांग्ला भाषा के लिए दी गई शहादत ने कैसे बदल दिया दुनिया का इतिहास?

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026: बांग्ला भाषा के लिए दी गई शहादत ने कैसे बदल दिया दुनिया का इतिहास?

International Mother Language Day: आज 21 फरवरी 2026 को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) बड़े सम्मान और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भाषाई विविधता, बहुभाषी शिक्षा और विश्वभर में मातृभाषाओं के संरक्षण व संवर्धन के महत्व को रेखांकित करता है। हर वर्ष इस अवसर पर विभिन्न देशों में संगोष्ठियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक अभियान और जागरूकता पहल आयोजित की जाती हैं जिनका उद्देश्य लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और जिम्मेदारी का एहसास कराना है।

यह वैश्विक दिवस UNESCO के नेतृत्व में मनाया जाता है। यूनेस्को का मानना है कि भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं बल्कि वे किसी भी समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं, इतिहास और सामूहिक स्मृतियों की वाहक होती हैं। जब कोई भाषा समाप्त होती है तो उसके साथ उस समाज की अनमोल सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान भी लुप्त हो जाता है।

सिल्वर जुबली समारोह और 2026 की थीम

21 फरवरी 2026 को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की प्रमुख थीम ‘बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज’ है। इस वर्ष का विषय इस बात पर जोर देता है कि बहुभाषी शिक्षा की दिशा तय करने में युवाओं की भागीदारी कितनी अहम है। यह थीम युवा पीढ़ी की पहचान, उनकी सक्रिय भूमिका और समावेशी शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। साथ ही, इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और भाषाई विविधता को संरक्षित व प्रोत्साहित करना भी है, ताकि हर भाषा और संस्कृति को सम्मान मिल सके।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का इतिहास

21 फरवरी की तारीख का चुनाव एक से जुड़ा है। यह दिन 1952 के बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) के भाषा आंदोलन की याद दिलाता है। उस समय छात्रों ने बांग्ला को राष्ट्रीय भाषा के रूप में मान्यता देने की मांग करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इतिहास के इस दुर्लभ क्षण को सम्मान देने के लिए यूनेस्को ने 1999 में इस दिन की घोषणा की और साल 2000 में पहली बार इसे वैश्विक स्तर पर मनाया गया।

मातृभाषा में शिक्षा

अनिवार्य वर्ष 2026 के फोकस क्षेत्रों में सबसे प्रमुख है। यूनेस्को के अनुमान के अनुसार दुनिया भर में 8,300 से अधिक भाषाएं हैं, लेकिन लगभग 40% शिक्षार्थियों की पहुंच ऐसी भाषा में शिक्षा तक नहीं है जिसे वे समझते हों। रिपोर्ट बताती है कि हर दो सप्ताह में एक भाषा लुप्त हो जाती है जो अपने साथ एक पूरी सांस्कृतिक विरासत ले जाती है। इसलिए मातृभाषा में शिक्षा अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि समानता और सम्मान के लिए आवश्यक है।

भारत में भाषाई समावेशिता

भारत इस दिवस को अपनी 22 अनुसूचित भाषाओं और सैकड़ों क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री को डिजिटल बनाकर सक्रिय रूप से मनाता है। ‘भारतवाणी’ जैसे प्रोजेक्ट भाषाई विरासत को संरक्षित करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। 2026 में डिजिटल सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि तकनीक के माध्यम से लुप्तप्राय भाषाओं को फिर से जीवित किया जा सके।

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