अगर भारत 18 दिन और इंतजार कर लेता तो उसे ऐसे समझौते में नहीं फंसना पड़ता-पवन खेड़ा

अगर भारत 18 दिन और इंतजार कर लेता तो उसे ऐसे समझौते में नहीं फंसना पड़ता-पवन खेड़ा

कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ रद्द किए जाने से पहले भारत ने जल्दबाजी में अमेरिका के साथ ‘एकतरफा और भारत विरोधी’ व्यापार समझौता कर लिया. पार्टी ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भारत 18 दिन और इंतजार कर लेता तो उसे ऐसे समझौते में नहीं फंसना पड़ता.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वॉशिंगटन को देर रात फोन क्यों किया. उन्होंने कहा, ‘जल्दबाजी शैतान का काम होती है. अगर भारत सिर्फ 18 दिन और इंतजार करता, तो शायद हम खुद को एकतरफा और भारत विरोधी व्यापार समझौते में घिरा हुआ नहीं पाते.’
खेड़ा ने कहा कि 2 फरवरी को मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ एक ट्रेड फ्रेमवर्क पर सहमति जताई थी. इसके तहत भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने मोदी सरकार और ट्रंप प्रशासन, दोनों के लिए कानूनी और कूटनीतिक स्थिति को जटिल बना दिया.
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के तथाकथित वैश्विक टैरिफ को खारिज कर दिया है. अगर भारत 18 दिन और इंतजार करता, तो शायद हमें एकतरफा समझौते में नहीं फंसना पड़ता. 2 फरवरी को मोदी ने वॉशिंगटन को देर रात फोन क्यों किया? भारत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक इंतजार करने की अपनी शुरुआती रणनीति क्यों छोड़ दी?’
उन्होंने आगे सवाल उठाए, ‘क्या इसकी वजह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का खुलासा है? क्या यह जेफ्री एपस्टीन फाइल्स की छाया है? क्या यह गौतम अडानी से जुड़ा अमेरिकी आपराधिक मामला है? या फिर ये सब वजहें हैं? आज कांग्रेस की बात सही साबित हुई है: नरेंद्र मोदी समझौते में कमजोर स्थिति में हैं.’
इधर कांग्रेस ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत भी किया. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप की पूरी टैरिफ नीति को रद्द करने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को सलाम. इसकी वैचारिक संरचना को देखते हुए यह फैसला काफी चौंकाने वाला है.’ उन्होंने कहा, ‘6-3 का फैसला निर्णायक होता है. जांच-परख और संतुलन की अमेरिकी व्यवस्था अब भी काम कर रही है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को खारिज कर दिया. यह फैसला उनके आर्थिक एजेंडे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. न्यायाधीशों के बहुमत ने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार कर लगाने का अधिकार, जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं, स्पष्ट रूप से अमेरिकी कांग्रेस को दिया गया है.

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