व्हिस्की ऑन द रॉक्स, बार में बोलने से पहले इसका गणित जान लीजिए

व्हिस्की ऑन द रॉक्स, बार में बोलने से पहले इसका गणित जान लीजिए

व्हिस्की ऑन द रॉक्स’… बार में पहुंचते ही कई लोगों की जुबान पर यही नाम आता है. पर कभी सोचा है कि इसका यह नाम कहां से आया है. वाइन एक्सपर्ट सोनल हॉलैंड कहती हैं, अल्कोहल लेने वाले लोग इस लाइन का इस्तेमाल तो बहुत करते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि कहां से इसका चलन शुरू हुआ है. इसकी वजह क्या है.

व्हिस्की ऑन द रॉक्स के चलन की शुरुआत का श्रेय स्कॉटलैंड की परंपरा को जाता है. जहां बर्फ आसानी से नहीं उपलब्ध होती थी. जुगाड़ के जरिए व्हिस्की और दूसरी अल्कोहलिक ड्रिंक को ठंडा किया जाता था. जानिए, क्या है व्हिस्की ऑन द रॉक्स के पीछे की असली कहानी.

व्हिस्की ऑन द रॉक्स’ की कहानी

व्हिस्की ऑन द रॉक्स में दो महत्वपूर्ण शब्द हैं. पहला व्हिस्की और दूसरा रॉक. इस रॉक शब्द में ही इसकी कहानी छिपी है. स्कॉटलैंड में व्हिस्की को ठंडा करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल नहीं होता था. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां बर्फ आसानी से नहीं उपलब्ध होती थी.इसलिए नदी के ठंडे पानी में डूबे चट्टान के पत्थरों का इस्तेमाल किया जाता था. ठंडे पानी में लम्बे समय से डूबे पत्थरों को ड्रिंक में डालकर व्हिस्की को ठंडा किया जाता था.

Why Is It Called Whiskey On The Rocks History Connection To Scottish Tradition

व्हिस्की ऑन न रॉक्स का चलन स्कॉटलैंड के कारण आया.

स्कॉटलैंड में ड्रिंक को पीते समय पानी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता था. इसलिए वहां ठंडे पत्थरों का चलन बढ़ा. अंग्रेजी में ऐसा करने के चलन को व्हिस्की ऑन द रॉक्स कहा गया.इस तरह व्हिस्की ऑन द रॉक्स लाइन चर्चा में आ गई और आज भी बार में यह आमतौर पर बोली जाती है.

Whiskey On The Rocks History

वाइन एक्सपर्ट सोनल हॉलैंड कहती हैं कि ड्रिंक में हमेशा बड़े आकार की बर्फ का टुकड़ा ही डालना चाहिए.

बार में बर्फ का गणित भी जान लीजिए

बहुत लोगों को लगता है कि व्हिस्की या दूसरी ड्रिंक में कोई भी बर्फ डाल देनी चाहिए, इसे सिर्फ ठंडा ही तो करना है, जबकि यह तरीका गलत है. वाइन एक्सपर्ट सोनल हॉलैंड कहती हैं कि ड्रिंक में हमेशा बड़े आकार की बर्फ का टुकड़ा ही डालना चाहिए. ऐसा क्यों करना चाहिए, उन्होंने इसका भी जवाब दिया है.

वह कहती हैं, बर्फ का बड़ा टुकड़ा पिघलने में समय लेता है. यह धीरे-धीरे पिघलता है. नतीजा, ड्रिंक का अरोमा बरकरार रहता है. इसका टेस्ट नहीं बदलता. इसका फ्लेवर मेंटेन रहता है. यूं तो शराब किसी भी रूप में लेना खराब है, लेकिन जब भी व्हिस्की या दूसरी ड्रिंक में बर्फ का टुकड़ा डालें तो इसका आकार बड़ा होना चाहिए.

वाइन एक्सपर्ट सोनल हॉलैंड कहती हैं, बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े जल्दी पिघलते हैं. इसलिए जल्दी ही व्हिस्की या दूसरी अल्कोहलिक ड्रिंक का टेस्ट भी बदलता है. वो सामान्य तापमान पर आने लगती है. यही वजह है कि इसके लिए बर्फ के बड़े क्यूब का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.

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