टैटू बनवाना क्यों है खतरनाक, बाबा रामदेव से जानें कैसे रखें सेहत का ख्याल

टैटू बनवाना क्यों है खतरनाक

टैटू इन दिनों फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। यादें, कभी प्यार, कभी विद्रोह बच्चा हो या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष, टैटू अब ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल ये है जो दिख रहा है, क्या वो ही पूरी कहानी है ? या इस स्याही के पीछे कुछ ऐसा भी है जो चुपचाप शरीर के अंदर काम कर रहा है ? दिलचस्प बात ये है कि टैटू कोई नई चीज नहीं है। हजारों साल पहले जब फैशन शब्द पैदा भी नहीं हुआ था तब भी इंसान अपने शरीर पर निशान बनाता था, मिस्र की ममीज पर मिले टैटू नवपाषाण काल के निशान ये बताते हैं कि टैटू पहचान और आस्था का प्रतीक था। और अगर हिंदुस्तान की बात करें तो यहां टैटू को कहते थे ‘गोदना’। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार-झारखंड की महिलाएं चेहरे और हाथों पर गोदना गुदवाती थीं। कहीं पति का नाम, कहीं नजर उतारने का ताबीज, तो कहीं सामाजिक पहचान। लेकिन उस दौर में काजल, हल्दी, इंडिगो यानि नील और मिट्टी से बनी स्याही का इस्तेमाल होता था। बिल्कुल नेचुरल शरीर और सेहत से तालमेल बैठाते हुए।

लेकिन आज का टैटू गोदना से बिल्कुल अलग है आज सुई मशीन से चलती है और स्याही आती है केमिकल फैक्ट्री से आज की टैटू इंक में ब्लैक कार्बन, हैवी मैटल, प्लास्टिक जैसे कण होते हैं यही फर्क है जहां गोदना संस्कृति था वहीं टैटू अब केमिकल से बनता है। और यहीं से शुरू होती है टैटू और सेहत की असली कहानी। जब टैटू बनता है तो सुई स्किन को चीरती है, खून निकलता है और दरवाजा खुल जाता है बैक्टीरिया के लिए। अगर सुई साफ न हो तो हेपेटाइटिस-बी, सी यहां तक कि HIV तक का खतरा बन जाता है।

लेकिन सबसे बड़ा खतरा बाद में सामने आता है। टैटू की स्याही के माइक्रो पार्टिकल्स ‘लिम्फ सिस्टम’ के जरिए ‘लिम्फ नोड्स’ में जमा हो जाते हैं यानि वही जगह जो बॉडी के डिफेंस का कंट्रोल रूम है। नतीजा क्रॉनिक इनफ्लेमेशन, गांठें, एलर्जी और कुछ मामलों में गंभीर बीमारियों की शुरुआत। इतना ही नहीं टैटू के हर रंग का खतरा अलग है। काली स्याही, इम्यून बीमारियों से जुड़ी होती है। तो लाल स्याही सबसे ज्यादा एलर्जी वाली। नीली स्याही आंखों पर असर डालती है। धूप, लेजर या MRI में ये स्याही टूटकर और जहरीले केमिकल छोड़ती है जो वाइटल ऑर्गन्स तक को डैमेज करती है। तो चलिए आज बॉडी को डिटॉक्स करने के साथ, सेहत का ख्याल रखना है योगगुरु बाबा रामदेव से जानते हैं।

लाइफस्टाइल की बीमारी

बीपी-शुगर

हाई कोलेस्ट्रॉल

ओबेसिटी

थायराइड

लंग्स प्रॉब्लम

इनसोम्निया

आर्थराइटिस

डेफिशियेंसी

रोज़ योग के फायदे

एनर्जी बढ़ेगी

बीपी कंट्रोल

वजन कंट्रोल

शुगर कंट्रोल

नींद में सुधार

बेहतर मूड

मजबूत होगी इम्यूनिटी

गिलोय-तुलसी काढ़ा

हल्दी वाला दूध

मौसमी फल

बादाम-अखरोट

हार्ट को हेल्दी कैसे बनाए

लौकी का सूप

लौकी की सब्जी

लौकी का जूस

किडनी डिजीज कैसे कंट्रोल करें

नमक

चीनी

प्रोटीन

थायराइड को कंट्रोल करने के उपाय

वर्कआउट जरूर करें।

सुबह एप्पल विनेगर पीएं।

रात में हल्दी दूध लें।

कुछ देर धूप में बैठें।

7 घंटे की नींद जरूर लें। 

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। हिमाचली खबर किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

 

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