पहले हनुमान की प्रतिमा, फिर मां दुर्गा की मूर्ति… भूखे-प्यासे कुत्ता 5 दिन से कर रहा परिक्रमा, लोगों ने बताया भैरव का रूप; डॉक्टर ने बता दी सच्चाई

पहले हनुमान की प्रतिमा, फिर मां दुर्गा की मूर्ति… भूखे-प्यासे कुत्ता 5 दिन से कर रहा परिक्रमा, लोगों ने बताया भैरव का रूप; डॉक्टर ने बता दी सच्चाई

बिजनौर जनपद के नगीना इलाके का नंदपुर गांव में इन दिनों एक कुत्ता चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मंदिर में कुत्ते की रहस्यमयी हरकतों की वजह से वहां तमाशबीनों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है. आलम यह है कि लोग अब कुत्ते की ही पूजा करने लगे हैं. पिछले चार दिनों से यह कुत्ता मंदिर परिसर में बिना रुके और बिना थके परिक्रमा कर रहा है. शुरुआती तीन दिनों तक उसने हनुमान जी की मूर्ति के चक्कर लगाए और फिर मंदिर परिसर में ही स्थित मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा करने लगा.

लगातार 24 घंटे परिक्रमा करने के बाद, गुरुवार को इस कुत्ते ने दिन में करीब तीन घंटे आराम किया. ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में एक गद्दा डाल दिया है, जिस पर बैठकर वह विश्राम करता है. हैरानी की बात यह है कि मंदिर आने वाले श्रद्धालु अब कुत्ते के सामने ही माथा टेक रहे हैं. आराम के बाद वह कुत्ता पुनः मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा में जुट गया.

भैरव का रूप मानकर कर रहे पूजा

सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. कुछ ग्रामीणों का मानना है कि इस कुत्ते में किसी साधु या ऋषि-मुनि की आत्मा का वास है, तो कुछ इसे भगवान भैरवनाथ का रूप मानकर पूज रहे हैं. मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के बाहर प्रसाद और खिलौनों की दुकानें भी सज गई हैं.

ग्रामीण इस बात से हैरान हैं कि कुत्ता पिछले चार-पांच दिनों से बिना कुछ खाए-पिए लगातार परिक्रमा कर रहा है. उसके सामने दूध और रोटी भी रखी गई, लेकिन उसने कुछ नहीं चखा. मंदिर में अब लगातार भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का दौर जारी है.

डॉक्टरों ने बताया क्या है इसकी वजह

इस बीच, बिजनौर से पशु चिकित्सकों (Veterinary Doctors) की एक टीम भी जांच के लिए मौके पर पहुंची. डॉक्टरों के मुताबिक, कुत्ते के सिर पर चोट लगने के कारण उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है, जिसकी वजह से वह एक ही दिशा में गोल-गोल घूम रहा है. हालांकि, स्थानीय निवासियों ने डॉक्टरों की इस बात से असहमति जताई है. उनका तर्क है कि बिना खाए-पिए और बिना थके इतने दिनों तक परिक्रमा करना किसी दैवीय शक्ति के बिना संभव नहीं है. फिलहाल, यह घटना आस्था, अंधविश्वास, जिज्ञासा और वैज्ञानिक रहस्य का केंद्र बनी हुई है.

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