बांग्लादेश में दो हिंदुओं की मौत, पेट्रोल पंप कर्मी को कुचला..


बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. अलग-अलग इलाकों से सामने आई दो सनसनीखेज घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर पेट्रोल पंप पर काम करने वाले युवक को ईंधन के पैसे मांगने पर SUV से कुचल दिया गया, वहीं दूसरी ओर एक हिंदू मिठाई कारोबारी की भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी.

पहली घटना: पेट्रोल के पैसे मांगे, SUV ने कुचल दिया
पहली घटना बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के गोलंदा मोड़ की है. यहां करीम फिलिंग स्टेशन पर काम करने वाले 30 वर्षीय रिपन साहा की शुक्रवार तड़के बेरहमी से हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, एक काली SUV ने करीब 3,700 रुपये का ईंधन भरवाया और बिना भुगतान किए निकलने लगी. रिपन साहा ने जब गाड़ी रोकने की कोशिश की और सामने खड़ा हो गया, तो चालक ने उसे कुचलते हुए गाड़ी भगा दी. मौके पर ही उसकी मौत हो गई.

पूर्व BNP नेता और ड्राइवर गिरफ्तार
पुलिस ने बाद में SUV को जब्त कर लिया और उसके मालिक अबुल हाशेम उर्फ सुजन (55) और ड्राइवर कमाल हुसैन (43) को गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार, सुजन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का पूर्व जिला कोषाध्यक्ष और जूबो दल का पूर्व अध्यक्ष रह चुका है. पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करने की बात कही है.

दूसरी घटना: हिंदू मिठाई कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या
दूसरी दिल दहला देने वाली घटना गाजीपुर जिले से सामने आई है. यहां 55 वर्षीय लिटन चंद्र घोष उर्फ काली की उनकी ही मिठाई की दुकान में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. लिटन अपनी दुकान में काम करने वाले 17 वर्षीय नाबालिग कर्मचारी को बचाने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, मामूली कहासुनी के बाद मसूम मिया नामक युवक अपने माता-पिता के साथ दुकान पर पहुंचा और झगड़ा बढ़ गया.

इसी दौरान लिटन के सिर पर फावड़े से वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने तीनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया. पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है.

सत्तापलट के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले तेज
विशेषज्ञों का कहना है कि 2024 के सत्तापलट के बाद से बांग्लादेश में हालात अस्थिर हैं. इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता बढ़ने से हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हमले बढ़े हैं. साल 2022 की जनगणना के मुताबिक, बांग्लादेश में करीब 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 8 प्रतिशत हैं. धार्मिक भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने देशभर में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है.

परिषद के मुताबिक, दिसंबर 2025 में ही सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की गईं, जो हालात की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाती हैं. इस मुद्दे पर भारत ने भी बांग्लादेश की आलोचना की है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे लगातार हमले गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

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